



अल्मोड़ा-देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग,संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए पूर्व दर्जा मंत्री बिट्टू कर्नाटक ने जिलेभर से पहुंचे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के उत्तराधिकारियों को भव्य कार्यक्रम में सम्मानित किया। कार्यक्रम में अल्मोड़ा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों को सम्मान प्रदान कर उनके परिवारों के योगदान को नमन किया गया।कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के संघर्ष और देश की आजादी में उनके योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आजादी का इतिहास केवल पुस्तकों में दर्ज घटनाओं का सिलसिला नहीं है,बल्कि यह उन हजारों सेनानियों के त्याग और संघर्ष की गाथा है,जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन तक समर्पित कर दिया।उनके बलिदान के कारण ही देशवासियों को स्वतंत्र वातावरण में जीवन जीने का अवसर मिला है।पूर्व दर्जा मंत्री बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। कई सेनानियों ने यातनाएं सहीं और अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा।उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों का सम्मान करना महज एक औपचारिकता नहीं बल्कि उनके त्याग,संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।इन परिवारों ने पीढ़ियों से स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों और उनके आदर्शों को जीवित रखा है। समाज और सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसे परिवारों के योगदान को सम्मान के साथ याद किया जाए।कर्नाटक ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और सेनानियों के संघर्ष से परिचित कराना बेहद जरूरी है।देश की आजादी आसानी से हासिल नहीं हुई बल्कि इसके पीछे असंख्य लोगों का त्याग और बलिदान रहा है।युवा पीढ़ी इन महान सेनानियों के जीवन से देशभक्ति, अनुशासन,त्याग और सामाजिक जिम्मेदारी की प्रेरणा ले सकती है।कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के उत्तराधिकारियों ने भी अपने विचार साझा किए।उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।आज के युवाओं को यह बताना जरूरी है कि देश की स्वतंत्रता के लिए उनके पूर्वजों ने किन परिस्थितियों का सामना किया और किस प्रकार राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखा।आश्रितों ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृतियों को संजोने और उनके योगदान को इतिहास के पन्नों में सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन के स्थानीय इतिहास से भी परिचित कराया जाना चाहिए।पूर्व दर्जा मंत्री बिट्टू कर्नाटक ने कार्यक्रम में पहुंचे सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के उत्तराधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियां राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं।उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के संघर्ष, आदर्शों और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सम्मान समारोह में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए उत्तराधिकारियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को भावपूर्ण बना दिया।कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कार्यक्रम में कमलेश पांडे,भरत पांडे,बद्री दत्त पांडे,हितेश तिवारी,बिपिन चंद्र जोशी,शिव शंकर बोरा,कैलाश वर्मा,कुंवर सिंह चम्याल,विनोद शर्मा,विनय कुमार पांडे,चंद्रा कांडपाल,पुष्पा गैलाकोटी, पार्वती बिष्ट,सरस्वती राना, सुनीता राना,राधा तिवारी,गीता पांडेय,कलावती जोशी,नंदन सिंह कार्की,दुर्गा बुदलाकोटी को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर भूपेंद्र भोजक, देवेंद्र कर्नाटक ,रमेश चंद्र जोशी,हयातसिंह बिष्ट, कैलाश चन्द्र तिवारी,अभिषेक तिवारी,प्रकाश मेहता आदि उपस्थित रहे।
