अल्मोड़ा-भाजपा नेता एवं पूर्व दर्जा मंत्री बिट्टू कर्नाटक ने द्वाराहाट विधायक द्वारा प्रधानमंत्री एवं उनके परिवार को लेकर दिए गए वक्तव्य को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है,लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा देश के प्रधानमंत्री और उनके परिवार के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना न केवल निंदनीय है,बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक मर्यादाओं के भी विपरीत है।जारी बयान में बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि जनप्रतिनिधि समाज के लिए आदर्श होते हैं और उनसे शालीन एवं जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा की जाती है।उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध और वैचारिक असहमति लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियां और परिवार को विवादों में घसीटना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। ऐसे बयान समाज में गलत संदेश देते हैं और राजनीतिक वातावरण को दूषित करने का कार्य करते हैं।उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री का पद सर्वोच्च संवैधानिक पदों में से एक है और इस पद की गरिमा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक तथा जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है।राजनीतिक लाभ के लिए व्यक्तिगत स्तर पर की गई टिप्पणियां लोकतांत्रिक संवाद की स्वस्थ परंपरा को कमजोर करती हैं।उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं,लेकिन भाषा की मर्यादा और सार्वजनिक जीवन की गरिमा हर परिस्थिति में बनाए रखनी चाहिए।बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि जनता अपने जनप्रतिनिधियों से विकास, रोजगार,शिक्षा,स्वास्थ्य और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की अपेक्षा करती है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग जनहित के विषयों से ध्यान भटकाकर व्यक्तिगत टिप्पणियों के माध्यम से राजनीतिक वातावरण को तनावपूर्ण बनाने का प्रयास कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि इस प्रकार की बयानबाजी से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता,बल्कि राजनीतिक संवाद का स्तर गिरता है।पूर्व दर्जा मंत्री ने द्वाराहाट विधायक से अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ की गई टिप्पणी से करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि से कोई अनुचित टिप्पणी हो जाती है तो उसे स्वीकार करते हुए सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करना लोकतांत्रिक परंपराओं का हिस्सा है।उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा और मर्यादित आचरण अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सम्मानजनक संवाद और सकारात्मक राजनीति आवश्यक है।देश और प्रदेश के विकास के लिए सभी को जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रहकर कार्य करना चाहिए न कि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप और अमर्यादित टिप्पणियों में उलझना चाहिए।

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