

अल्मोड़ा-पशुपालन विभाग अल्मोड़ा द्वारा जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों की आय बढ़ाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। विभाग द्वारा बकरी पालन, महिला बकरी पालन, गोपालन,बैकयार्ड कुक्कुट पालन,टीकाकरण,कृत्रिम गर्भाधान,चारा बीज वितरण सहित कई योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाया जा रहा है।मुख्य पशु चिकित्साधिकारी अल्मोड़ा डॉ. योगेश अग्रवाल की ओर से जारी जानकारी के अनुसार,पशुपालन,मत्स्य पालन,डेयरी विकास एवं कौशल विकास मंत्री उत्तराखंड सरकार सौरभ बहुगुणा के निर्देशानुसार जनपद में राज्य सेक्टर योजनाओं के तहत गोपालन (अनुसूचित जाति), 10+1 बकरी पालन (सामान्य एवं अनुसूचित जाति) तथा महिला बकरी पालन (3+1) योजनाएं संचालित की जा रही हैं।विभाग के अनुसार जनपद के समस्त वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारियों एवं पशु चिकित्साधिकारियों द्वारा ग्राम स्तर पर इन योजनाओं के प्रस्ताव प्राप्त किए जाते हैं। इसके बाद पात्र लाभार्थियों के चयन की कार्रवाई समिति के माध्यम से की जाती है।चयनित लाभार्थियों को अनुदान की धनराशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाने वाले लोगों को आर्थिक सहायता मिल रही है।विभाग द्वारा बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना के अंतर्गत अनुसूचित वर्ग की गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को कुपोषण से निजात दिलाने के उद्देश्य से निःशुल्क 50 कुक्कुट चूजे, दाना और जाली उपलब्ध कराई जाती है। पशु चिकित्सालयों के माध्यम से प्रत्येक वर्ष यह सुविधा प्रदान की जाती है।
इसके अलावा जनपद में प्रत्येक वर्ष पशु चिकित्सालयों के माध्यम से मौसमी रबी एवं खरीफ चारा बीज,जिसमें मक्का,चरी,जई,बरसीम आदि शामिल हैं, का निःशुल्क वितरण किया जाता है। इससे पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है और पशुओं के पोषण स्तर में सुधार हो रहा है।पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए हरा चारा उपलब्ध कराने के साथ ही बेहतर नस्ल और अधिक दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा लैंगिकीकृत वीर्य उपलब्ध कराया जा रहा है। विभाग के अनुसार इससे लगभग 90 प्रतिशत मादा बछिया एवं कटिया पैदा होती हैं। अच्छी नस्ल की मादा बछिया एवं कटिया के पैदा होने से दुग्ध उत्पादन में लगातार वृद्धि होने की उम्मीद है और अनियंत्रित पशुओं की संख्या को भी नियंत्रित करने में मदद मिल रही है।पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के निर्देशानुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में जनपद के सभी 11 विकासखंडों में पशुपालन विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विभाग द्वारा पशुपालकों को चिकित्सा,बधियाकरण, टीकाकरण एवं कृत्रिम गर्भाधान जैसी सुविधाओं का लाभ सीधे घर पर ही उपलब्ध कराया जा रहा है।विभाग के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में इन योजनाओं से लाभान्वित पशुपालकों की आय में वृद्धि हुई है।विकासखंड चौखुटिया में गोट वैली योजना के अंतर्गत स्थापना की जा रही है।इससे बड़ी संख्या में महिला लाभार्थियों को लाभ मिल रहा है,जिनकी वार्षिक आय 50 हजार रुपये से अधिक है।पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए विभाग द्वारा लगातार टीकाकरण अभियान भी चलाया जा रहा है। लंपी स्किन रोग फैलने से पहले जनपद में अब तक कुल 96,573 गोवंशीय पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। इससे पशुधन को संक्रामक बीमारियों से बचाने में काफी मदद मिली है।वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन को रोकने के उद्देश्य से ग्राम्य गौ सेवक योजना के माध्यम से नर गोवंशीय पशुओं के भरण-पोषण के लिए प्रतिदिन 80 रुपये प्रति पशु की दर से धनराशि प्रदान की जा रही है। विभागीय जानकारी के अनुसार पांच नर गोवंशीय पशुओं के भरण-पोषण के लिए एक माह में कुल 12,400 रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।पशुपालन विभाग का कहना है कि विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को मजबूत किया जा रहा है। बकरी पालन, गोपालन, कुक्कुट पालन, चारा उत्पादन, कृत्रिम गर्भाधान और पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से ग्रामीणों को अपने गांव में ही रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं।विभाग के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र पशुपालकों तक पहुंचने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी।
