अल्मोड़ा-नगर निगम अल्मोड़ा के कर्मचारी संगठनों ने कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर बड़ा मोर्चा खोलते हुए 17 सूत्रीय मांगपत्र तैयार किया तथा नगर आयुक्त सीमा विश्वकर्मा को ज्ञापन के माध्यम से इसे सौंपा।दिनांक 27 जुलाई 2026 को नगर निगम सभागार में देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ तथा निकाय कर्मचारी संघ,शाखा नगर निगम अल्मोड़ा की संयुक्त बैठक आयोजित हुई,जिसमें कर्मचारियों ने वेतन, कार्यप्रणाली,प्रशासनिक हस्तक्षेप,मानसिक उत्पीड़न और कार्यालय व्यवस्था से जुड़ी अनेक समस्याएं प्रमुखता से उठाईं।बैठक के बाद दोनों संगठनों ने महापौर और नगर आयुक्त से कर्मचारियों के साथ अलग से वार्ता करने की मांग भी की।बैठक की अध्यक्षता निकाय कर्मचारी संघ के शाखा अध्यक्ष पुष्कर सिंह बिष्ट तथा देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के शाखा अध्यक्ष दीपक चंदेल ने की। प्रदेश महामंत्री राजपाल पवार ने बैठक का समापन करते हुए कर्मचारियों से नियमों के अनुसार कार्य करने और किसी भी प्रकार के अनुचित दबाव में न आने का आह्वान किया।बैठक में कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि 25 जुलाई को हुई नगर निगम बोर्ड बैठक में कुछ पार्षदों द्वारा कर्मचारियों से सीधे तौर पर कार्य कराने के लिए अनुचित भाषा और व्यवहार का प्रयोग किया गया।कर्मचारियों का कहना था कि पार्षद/जनप्रतिनिधियों को किसी भी प्रशासनिक विषय पर संवाद महापौर अथवा नगर आयुक्त के माध्यम से करना चाहिए।यूनियन ने मांग की कि स्टेशनरी मद में पार्षदों को दिए जाने वाले 5000 रुपये के भुगतान की तर्ज पर यदि निगम के पास वित्तीय क्षमता है तो कम वेतन पर कार्य कर रहे कर्मचारियों का मानदेय भी बढ़ाया जाए।विशेष रूप से दैनिक आउटसोर्स कर्मचारियों का मासिक मानदेय बढ़ाकर कम से कम 20,000 रुपये किए जाने की मांग रखी गई।प्रशासनिक अधिकारी मुकेश भंडारी ने कहा कि बोर्ड बैठकों में तय एजेंडे के बजाय अन्य विषयों पर चर्चा होना बोर्ड की गरिमा के अनुरूप नहीं है।उन्होंने एजेंडा आधारित और नियमसम्मत कार्यप्रणाली अपनाने पर जोर दिया।टैक्स कलेक्टर मनोज मिश्रा ने कहा कि बाजार व्यवस्था, अतिक्रमण हटाने और चालानी कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम स्तर पर एक विशेष टीम गठित की जानी चाहिए।साथ ही लाइसेंस और नगर सेवा पोर्टल से जुड़े कार्यों के लिए अतिरिक्त कार्मिक उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई गई।लेखा लिपिक बबीता बिष्ट ने स्वास्थ्य एवं पेंशन अनुभाग में कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डाले जाने का मुद्दा उठाया।उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को सीधे निर्देश देकर मानसिक तनाव की स्थिति उत्पन्न की जा रही है।पेंशन संबंधी कार्यों के लिए अतिरिक्त कर्मचारी की मांग भी की गई।महिला कर्मचारियों ने निगम कार्यालय में महिला शौचालय के निर्माण की मांग को अत्यंत आवश्यक बताया।कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि स्थायी निवास प्रमाण पत्र और अन्य प्रमाण पत्र तत्काल जारी कराने के लिए कुछ पार्षदों द्वारा दबाव बनाया जाता है जिससे टैक्स और अन्य विभागीय कार्य प्रभावित होते हैं।टैक्स अनुभाग की गोपनीयता बनाए रखने और अनुभवी कर्मचारियों की तैनाती की मांग भी बैठक में उठाई गई।सहायक अभियंता दीपक सिंह मटियाली और अन्य कर्मचारियों ने कहा कि विभागीय कार्य केवल नियमों के अनुसार और उचित प्रशासनिक माध्यम से ही कराए जाएं।उन्होंने बोर्ड बैठकों से पहले विभागाध्यक्षों और पटल सहायकों के साथ एजेंडे की विस्तृत समीक्षा करने का सुझाव दिया।बैठक में यह भी कहा गया कि विभागीय कार्यों में जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप लगातार बढ़ रहा है जिससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है।यूनियन ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों पर महापौर की छवि धूमिल करने के आरोप लगाए जाना निराधार है।बैठक के बाद दोनों कर्मचारी संगठनों ने संयुक्त रूप से महापौर और नगर आयुक्त को पत्र भेजकर कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र बैठक आयोजित करने का अनुरोध किया।यूनियन ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से ही संभव है और नगर निगम प्रशासन को कर्मचारियों के साथ नियमित वार्ता की व्यवस्था करनी चाहिए।बैठक एवं ज्ञापन देने वालो में राजपाल पवार प्रदेश महामंत्री देवभूमि उत्तराखण्ड सफाई कर्मचारी संघ,पुष्कर सिंह बिष्ट अध्यक्ष निकाय कर्मचारी संघ,दीपक चन्देल अध्यक्ष देवभूमि उत्तराखण्ड सफाई कर्मचारी संघ,कमल उपाध्याय महासचिव,राजेश टांक महासचिव,मनोज मेहरा उपाध्यक्ष,बबीता बिष्ट महिला उपाध्यक्ष,दीपक बिष्ट विधि अधिकारी,राजीव शर्मा,बसंती बिष्ट, लीला रावत, सतीश कुमार,राजेन्द्र,अशोक,बसन्त बल्लभ पांडे,मनोज बिष्ट सहित दर्जनों कर्मचारी शामिल रहे।

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