



जागेश्वर-पहाड़ में रहकर स्वरोजगार की नई मिसाल कायम करने वाली विकासखंड धौलादेवी की जय मां कालिका स्वयं सहायता समूह की हर्षिता सुयाल बिष्ट को मुख्यमंत्री उद्यमशाला चौपाल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के अवसरों को छोड़ अपने गांव और पहाड़ लौटकर स्वरोजगार को अपनाने वाली हर्षिता की कहानी आज क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा हर्षिता को सम्मानित किया जाना सरकार की उस सोच को भी मजबूती देता है जिसमें पहाड़ की प्रतिभाओं को अपने ही गांव में रोजगार और उद्यम के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।मुख्यमंत्री के नेतृत्व में स्वरोजगार,महिला सशक्तीकरण और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में नई उम्मीद पैदा हुई है।हर्षिता सुयाल बिष्ट ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद किसी शहर में नौकरी करने के बजाय अपने पहाड़ लौटने का निर्णय लिया।उन्होंने स्वरोजगार को केवल अपने लिए रोजगार का माध्यम नहीं बनाया,बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया।उनका प्रयास पहाड़ से होने वाले पलायन को रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में एक सार्थक पहल बन गया है।हर्षिता के नेतृत्व में जय मां कालिका स्वयं सहायता समूह द्वारा उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपन कला के साथ ही स्थानीय एवं जैविक उत्पादों तथा विभिन्न पहाड़ी उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है।समूह से जुड़ी महिलाओं को उत्पाद तैयार करने से लेकर उन्हें बाजार तक पहुंचाने में सहयोग दिया जा रहा है।विभिन्न मेलों, प्रदर्शनियों और बाजारों के माध्यम से पहाड़ के उत्पादों को नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस पहल से गांव की महिलाओं को अपने हुनर को रोजगार में बदलने का अवसर मिल रहा है।महिलाएं अपने घर और गांव में रहकर आर्थिक गतिविधियों से जुड़ रही हैं,जिससे उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ रही हैं।हर्षिता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वरोजगार को बढ़ावा देने और पलायन रोकने के संकल्प तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन से पहाड़ की महिलाओं को अपने गांव में रहकर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है। सरकार द्वारा उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित किए जाने से स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं।उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंचों पर पहाड़ के छोटे उद्यमियों और महिलाओं को सम्मान मिलने से उनका उत्साह बढ़ता है।उन्होंने कहा कि सरकार यदि इसी तरह स्थानीय उत्पादों,महिला समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को प्रोत्साहन देती रही तो आने वाले समय में पहाड़ में रोजगार के नए अवसर तेजी से विकसित होंगे।हर्षिता सुयाल बिष्ट ने मुख्यमंत्री द्वारा मिले सम्मान को अपने साथ काम कर रही सभी महिलाओं को समर्पित किया।उन्होंने मुख्यमंत्री,जिला प्रशासन, ब्लॉक स्तर के अधिकारियों और अपनी पूरी टीम का आभार जताया।उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है,बल्कि पहाड़ की हर उस महिला के संघर्ष,मेहनत और आत्मनिर्भरता का सम्मान है,जो अपने गांव में रहकर कुछ नया करने का सपना देखती है।उन्होंने कहा कि यदि इच्छाशक्ति हो तो पहाड़ में रहकर भी रोजगार और उद्यम के क्षेत्र में नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।हर्षिता की यह पहल न केवल महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो रोजगार की तलाश में पहाड़ से बाहर जाने को मजबूर होते हैं।इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर अपने गांव में स्वरोजगार की राह चुनने वाली हर्षिता ने साबित किया है कि पहाड़ की मिट्टी में प्रतिभा और मेहनत हो तो रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार पैदा भी किया जा सकता है।
