अल्मोड़ा-सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में व्याप्त अनियमितताओं,छात्र विरोधी नीतियों एवं प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ युवाओं और छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।इसी क्रम में नेता प्रतिपक्ष उत्तराखंड यशपाल आर्य के अल्मोड़ा आगमन पर युवा कांग्रेस एवं छात्र नेताओं ने उनसे मुलाकात कर विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न गंभीर मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की तथा ज्ञापन सौंपा।छाओं ने कहा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर भर्ती में रोस्टर संबंधी विवाद,प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी,छात्र हितों की अनदेखी तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों को शासन स्तर पर उठाने की मांग की।नेता प्रतिपक्ष ने इन मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर उठाने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर गोपाल भट्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुलपति,परिसर निदेशक अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए तत्काल पद छोड़ें।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता,प्रशासनिक व्यवस्था और छात्र कल्याण लगातार प्रभावित हो रहे हैं जिससे हजारों छात्रों का भविष्य संकट में पड़ता जा रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में लाखों रुपये की लागत से स्थापित बायो टॉयलेट आज जर्जर अवस्था में पड़े हैं,जबकि विभिन्न निर्माण कार्यों एवं खरीद प्रक्रियाओं में भी गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।इन मामलों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली के कारण संस्थान की साख को लगातार नुकसान पहुंच रहा है।गोपाल भट्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि युवा कांग्रेस एवं छात्र नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों पर शीघ्र वार्ता कर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो दीक्षांत समारोह से पूर्व विश्वविद्यालय परिसर में व्यापक आंदोलन एवं प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।उन्होंने कहा कि छात्रों की मूलभूत समस्याओं का समाधान तक विश्वविद्यालय में नहीं हो रहा हैं।छात्रों ने कहा कि अब छात्र समुदाय अपने अधिकारों,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विश्वविद्यालय के बेहतर भविष्य के लिए निर्णायक संघर्ष करने को तैयार है।लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।युवा कांग्रेस एवं छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

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