

रानीखेत-आपदा और संकट की घड़ी में जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने की अपनी जिम्मेदारी को अल्मोड़ा रेडक्रॉस लगातार जमीन पर निभा रहा है।इसी मानवीय भावना के साथ अल्मोड़ा से करीब 50 किलोमीटर दूर रानीखेत के खनिया गांव के पास नई बस्ती में रेडक्रॉस की टीम पहुंची और एक जरूरतमंद परिवार की मदद के लिए उसकी क्षतिग्रस्त छत पर तिरपाल डाली।टीम ने परिवार को कंबल भी वितरित किए ताकि बारिश और ठंड के बीच उन्हें कुछ राहत मिल सके।मदद का यह प्रयास इसलिए भी खास रहा क्योंकि परिवार की परेशानी की जानकारी मिलने के बाद रेडक्रॉस टीम ने दूरी की परवाह नहीं की और अल्मोड़ा से रानीखेत तक पहुंचकर मौके पर राहत कार्य किया। बारिश,आपदा और विपरीत परिस्थितियों में जब किसी जरूरतमंद के सिर पर छत बचाना चुनौती बन जाए, तब रेडक्रॉस का यह कदम केवल राहत सामग्री देना नहीं, बल्कि इंसानियत की छत उपलब्ध कराने जैसा है।टीम के सदस्यों ने मौके पर परिवार का हाल जाना और उनकी परिस्थितियों को समझते हुए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई।तिरपाल मिलने से परिवार को बारिश से राहत की उम्मीद जगी,वहीं कंबल मिलने से ठंड से बचाव में भी सहारा मिलेगा।इस दौरान रेडक्रॉस अध्यक्ष आशीष वर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज सनवाल, वरिष्ठ सदस्य हरीश कनवाल, यूथ रेडक्रॉस अध्यक्ष अमित साह मोनू, यूथ रेडक्रॉस सचिव मनोज भंडारी ‘मंटू’, यूथ रेडक्रॉस उपसचिव अभिषेक जोशी तथा विनीत चौरसिया सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।अल्मोड़ा से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी तय कर रानीखेत पहुंची टीम ने यह संदेश दिया कि जरूरतमंद की पुकार जहां तक पहुंचेगी, मदद का हाथ भी वहां तक पहुंचेगा। राहत कार्यों में लगातार सक्रिय अल्मोड़ा रेडक्रॉस की यह पहल संस्था की सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है।रेडक्रॉस के स्वयंसेवक अक्सर आपदा के समय प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर तिरपाल, कंबल, किचन सेट और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराते रहे हैं। यही वजह है कि संकट की घड़ी में रेडक्रॉस लोगों के लिए सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि भरोसे और उम्मीद का नाम बनती जा रही है।एक तिरपाल ने बारिश रोकी, एक कंबल ने ठंड से बचाया और कुछ संवेदनशील हाथों ने एक परिवार को यह एहसास दिलाया कि वे अकेले नहीं हैं। यही सेवा की असली तस्वीर है और यही रेडक्रॉस की सबसे बड़ी पहचान भी।
