










अल्मोड़ा-ऐतिहासिक मल्ला महल में आयोजित सात दिवसीय जय गोल्ज्यू महोत्सव 2026 के अंतर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में लोक कला, लोक संगीत और सांस्कृतिक विविधता का भव्य संगम देखने को मिला। महोत्सव में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति के साथ देश के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक लोक नृत्य शैलियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों, स्कूली बच्चों, वरिष्ठ लोक गायकों तथा बॉलीवुड गायक की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक संध्या को यादगार बनाया।जय गोल्ज्यू महोत्सव का आयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं संस्कार सांस्कृतिक एवं पर्यावरण समिति के संयुक्त सौजन्य से किया जा रहा है। महोत्सव का उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं को एक साझा मंच प्रदान करना है। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक श्री सुदेश शर्मा के मार्गदर्शन एवं सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर मिल रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ बच्चों की मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों के साथ हुआ। नन्हे कलाकारों ने अपनी प्रतिभा, उत्साह और आकर्षक प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके पश्चात उत्तराखंड की पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हुए ढोल-दमाऊं जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच छोलिया नृत्य, वैर एवं भगनौल जैसी लोक विधाओं की प्रस्तुतियां दी गईं। इन प्रस्तुतियों ने उत्तराखंड की विशिष्ट लोक परंपराओं, संगीत और सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रूप में सामने रखा।सांस्कृतिक संध्या में उत्तराखंड के वरिष्ठ लोक गायक श्री नैन नाथ रावल ने अपनी गायकी से श्रोताओं को लोक संगीत की मधुर अनुभूति कराई। उनकी प्रस्तुति ने उत्तराखंड की लोक परंपराओं और संगीत की समृद्ध विरासत को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया। वहीं, सायंकालीन कार्यक्रम में बॉलीवुड गायक श्री विकास भारद्वाज ने अपनी सुरीली आवाज में गीतों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उनकी प्रस्तुति का दर्शकों ने आनंद लिया और पूरा वातावरण संगीतमय हो उठा।महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोक नृत्य रहे। हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात एवं पंजाब से आए कलाकारों ने अपने-अपने राज्यों की विशिष्ट लोक नृत्य शैलियों, पारंपरिक वेशभूषा, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं का शानदार प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को भारत की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने और अनुभव करने का अवसर मिला।विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं की प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। अलग-अलग भाषाओं, परंपराओं और लोक कलाओं के बावजूद हमारी सांस्कृतिक जड़ें हमें एक सूत्र में बांधती हैं। जय गोल्ज्यू महोत्सव इसी सांस्कृतिक एकता, आपसी सद्भाव और लोक परंपराओं के संरक्षण का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।ऐतिहासिक मल्ला महल में आयोजित यह महोत्सव अल्मोड़ा की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा प्रदान करने के साथ ही स्थानीय कलाकारों और युवा प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर दे रहा है। ऐसे आयोजन न केवल हमारी पारंपरिक लोक विधाओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायक हैं, बल्कि पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और स्थानीय सांस्कृतिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करते हैं।जय गोल्ज्यू महोत्सव 2026 के माध्यम से अल्मोड़ा में उत्तराखंड की लोक संस्कृति और देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। महोत्सव की सांस्कृतिक संध्याएं लोक कला, संगीत और नृत्य के माध्यम से लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने तथा भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
