नैनीताल-उत्तरांचल फैडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन उत्तराखंड मंडल शाखा नैनीताल के अध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार पाठक द्वारा शासन व विभाग से मांग की गई है कि राजस्व परिषद की तरह ही अन्य विभागों में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को पद रिक्त होने पर गृह जनपद आबंटन किया जाय।राजस्व परिषद के अध्यक्ष ओमप्रकाश द्वारा कलैक्ट्रेट विभाग में चालीस से अधिक मुख्य प्रशासनिक अधिकारी व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पदों पर कार्यरत व दूसरे जनपदों में तैनात सदस्यों को गृह जनपद आबंटन कर कार्यभार ग्रहण करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।संगठनों की मांग पर विभाग द्वारा मुख्य प्रशासनिक अधिकारी व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद तो सृजित कर दिए गए।लेकिन पर्याप्त वेतनमान गजट नोटिफिकेशन कार्य व उत्तरदायित्व व गृह जनपद आबंटन जैसी कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है।हालात ऐसे हो गये है कि एक्ट की अपने अपने तरीके से व्याख्या की जा रही है और गृह जनपद के बाहर तैनाती दी जा रही है। इसको वैकल्पिक किया जाना चाहिए जो जाना चाहते हैं उन्हें दूसरा तीसरा जिला या जो भी जिला मांगना चाहे वरीयता दें सकते हैं।एक्ट के तहत पदाधिकारियों की व्यवस्था का भी ख्याल नहीं रखा जा रहा है जबकि पद धारण की तिथि के दो वर्ष तक पदाधिकारी को जिले में ही रहना चाहिए।प्रदेश में दो तरह की व्यवस्था हो रही है यह उचित नहीं है।शासन व विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में एकरूपता रखनी चाहिए।मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के कार्य व उत्तरदायित्व शासन से प्रख्यापित नहीं है गजट नोटिफिकेशन नहीं हुआ है और आहरण वितरण जैसे अधिकारों पर भी शासन चुप्पी साधे बैठा है। धीरेन्द्र कुमार पाठक अध्यक्ष फैडरेशन द्वारा शीर्ष पदाधिकारियों से भी यह बात संज्ञान में लेकर कार्यवाही की मांग की गई है।प्रदेश में दो तरह व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है।मिनिस्ट्री यल संवर्ग के पदों को शासन प्रशासनिक मान रहा है तो वेतनमान सुविधाएं व गजट नोटिफिकेशन व आहरण वितरण अधिकार सभी सुविधाएं भी प्रदान करें अन्यथा की स्थिति में पहले अधिकारों से लैस करें। शासन व विभाग स्तर पर इसे गंभीरता से लेना चाहिए अन्यथा इन्हीं मुद्दों को ठीक करने के लिए भविष्य में निश्चित रूप से आंदोलन तय है।पाठक द्वारा शिथिलीकरण को भी 30-6-22 से आगे विस्तारित करने की मांग की है तथा कहा है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाली ,संशोधित ए सी पी,गोल्डन कार्ड में सुधार आदि अन्य मुद्दों में भी प्रभावी कार्रवाई की जाय।