नैनीताल -उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड के प्रदेश उपाध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार पाठक ने मांग की है कि वर्ष 1994 में जिन शिक्षकों व कार्मिकों ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के लिए हड़ताल की थी उन्हें भी पूर्व में एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि व राज्य आंदोलनकारी घोषित करते हुए सम्मानित करने की बात कही थी। लेकिन तब से हजारों लाल बत्तियां बंट गई लेकिन राज्य आंदोलन को तीन महीने से अधिक खींचने वाले कार्मिकों जिन्होंने कि सरकारी कार्य एकदम बंद कर दिया था को ऐतिहासिक आंदोलन के योगदान के मध्येनजर कोई भी सम्मान नहीं दिया गया।यह आंदोलन उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन के बैनर तले लड़ा गया था। तत्कालीन समय में उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन की अगुआई कर रहे दौलतराम सेमवाल व उनकी टीम को भी सम्मानित नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।सभी तत्कालीन शिक्षकों व कार्मिकों को एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि देते हुए राज्य आंदोलनकारी कार्मिक घोषित कर उनका सम्मान राज्य सरकार द्वारा किया जाना चाहिए।यही प्राकृतिक न्याय होगा तथा जिन राज्य आंदोलनकारियों को अभी तक सम्मान नहीं दिया गया है उन्हें भी सम्मानित करना चाहिए।उस समय सभी शिक्षकों व कार्मिकों ने अपनी नौकरी को दांव पर लगाकर संघर्ष किया था।जनपद अल्मोड़ा के अध्यक्ष डॉ मनोज कुमार जोशी व वरिष्ठ उपाध्यक्ष,महेन्द्र सिंह गुसाईं व संयुक्त मंत्री पुष्कर सिंह भैसोड़ा द्वारा भी उत्तराखंड के आंदोलन में शामिल शिक्षकों कार्मिकों को सम्मानित करने की मांग की है।राजकीय शिक्षक संघ जनपद अल्मोड़ा के अध्यक्ष भारतेन्दु जोशी व सचिव भूपाल सिंह चिलवाल द्वारा भी शिक्षकों व कार्मिकों को सम्मानित करने की मांग की गई है

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