


अल्मोड़ा-श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार के यंग प्रोफेशनल शुभम शर्मा ने कहा कि मानव संसाधन का कुशल उपयोग किसी भी देश की आर्थिक प्रगति का मुख्य आधार होता है।हाल ही में संसद में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया द्वारा प्रस्तुत आंकड़े भारत के रोज़गार परिदृश्य में आ रहे एक बड़े सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करते हैं।मोदी सरकार की दूरदर्शी नीतियों के तहत संचालित नेशनल करियर सर्विस पोर्टल आज देश के युवाओं और नियोक्ताओं के बीच एक सशक्त डिजिटल सेतु बनकर उभरा है,जहाँ वर्तमान में 12 लाख से अधिक सक्रिय रोज़गार के अवसर उपलब्ध हैं।किसी भी राष्ट्रीय नीति की वास्तविक सफलता उसके ज़मीनी कार्यान्वयन और मजबूत प्रशासनिक ढांचे पर निर्भर करती है।इस दिशा में केंद्र सरकार का मॉडल करियर सेंटर्स की स्थापना करना एक अत्यंत सराहनीय और क्रांतिकारी कदम सिद्ध हुआ है।सरकार द्वारा निर्मित इस सुदृढ़ व्यवस्था के तहत इन केंद्रों में तैनात यंग प्रोफेशनल्स भी पूरी निष्ठा और तत्परता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।इसके साथ ही,इन मॉडल करियर सेंटर के माध्यम से युवाओं और छात्रों की करियर काउंसलिंग कर उन्हें उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार सीधे सही रोज़गार से जोड़ा जा रहा है।स्थानीय उद्योगों और निजी प्रतिष्ठानों से समन्वय स्थापित करने में इन यंग प्रोफेशनलो की मेहनत और प्रतिबद्धता वाकई काबिले-तारीफ है।जमीनी स्तर पर इनके इस समर्पित प्रयास से रिक्तियों को पोर्टल पर मोबिलाइज़ करने में बड़ी सफलता मिल रही है,जिससे सरकारी तंत्र का यह विज़न धरातल पर और अधिक प्रभावी ढंग से साकार हो रहा है।इसके साथ ही बाजार की बदलती मांगों के अनुकूल युवाओं को तैयार करने के लिए सरकार द्वारा 15 दिन से लेकर 3 महीने तक के अल्पकालिक कौशल विकास कार्यक्रम भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ चलाए जा रहे हैं। सरकार के इन निरंतर प्रयासों से देश के युवाओं की एंप्लॉयबिलिटी (रोज़गार क्षमता) में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है।संक्षेप में नेशनल करियर सर्विस का यह आधुनिक और पारदर्शी डिजिटल ढांचा, उद्योग-अनुकूल प्रशिक्षण व्यवस्था,सरकार का दूरदर्शी नेतृत्व और ज़मीनी स्तर पर कार्यरत यंग प्रोफेशनल्स का सराहनीय योगदान भारत में रोज़गार निर्माण का एक टिकाऊ व समावेशी मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।सरकार की यह जनकल्याणकारी नीति युवाओं की योग्यता और उद्योगों की मांग के बीच के अंतर को समाप्त कर देश को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो रही है।
