अल्मोड़ा- उत्तराखंड विधानसभा के दो दिवसीय सत्र को लेकर अल्मोड़ा विधायक मनोज तिवारी ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है।उन्होंने दो दिन के विधानसभा सत्र को जनता के पैसे की बर्बादी बताते हुए कहा कि इतने कम समय में प्रदेश की ज्वलंत समस्याओं पर गंभीर और सार्थक चर्चा कैसे संभव है?उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सदन में जनसमस्याओं को उठाने के लिए विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं दे रही है।लोकतंत्र में विधानसभा जनता की आवाज उठाने का सबसे महत्वपूर्ण मंच है लेकिन जब सदन की कार्यवाही ही सीमित समय के लिए आयोजित की जाएगी तो आम जनता की समस्याओं पर चर्चा कैसे होगी और उनके समाधान के लिए सरकार को जवाबदेह कैसे बनाया जाएगा?प्रेस वार्ता में विधायक मनोज तिवारी ने कहा कि विधानसभा सत्र का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं होना चाहिए। सदन वह स्थान है जहां प्रदेश की जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है,सरकार की नीतियों की समीक्षा की जाती है और जनप्रतिनिधि अपने अपने क्षेत्रों की समस्याओं को सरकार के सामने रखते हैं।ऐसे में सत्र की अवधि को केवल दो दिनों तक सीमित रखना जनहित के महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की संभावनाओं को सीमित करता है।उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में अनेक समस्याएं मौजूद हैं तब सरकार को सदन की कार्यवाही के लिए पर्याप्त समय निर्धारित करना चाहिए, ताकि प्रत्येक महत्वपूर्ण विषय पर गंभीरता से चर्चा हो सके।
विधायक मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि विपक्ष को सदन में जनता की समस्याएं उठाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि विधायक जनता के बीच से चुनकर आते हैं और उनके सामने आने वाली समस्याओं को विधानसभा तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी होती है। जनता अपने जनप्रतिनिधियों से उम्मीद करती है कि वे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवालों को सदन में उठाकर सरकार से जवाब मांगेंगे। लेकिन यदि विधानसभा सत्र की अवधि कम रखी जाएगी और जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिलेगा, तो जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना मुश्किल होगा।उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सत्ता पक्ष जहां सरकार की योजनाओं और नीतियों को सामने रखता है, वहीं विपक्ष का दायित्व है कि वह जनता की समस्याओं को उठाए, कमियों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करे और आवश्यक सुधारों की मांग करे। सदन में होने वाली चर्चा से ही विभिन्न मुद्दों के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाने और उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। इसलिए विधानसभा की कार्यवाही को पर्याप्त समय देना आवश्यक है।विधायक मनोज तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में अनेक ऐसी समस्याएं हैं, जिन पर विस्तार से चर्चा की आवश्यकता है। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, ग्रामीण सड़कों की स्थिति, पेयजल संकट, शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा की मांग करते रहे हैं। इन समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस कार्ययोजना, पर्याप्त बजट और प्रभावी निगरानी से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान जनप्रतिनिधियों को इन विषयों पर सरकार से सवाल पूछने और जवाब प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए। यदि सत्र सीमित अवधि का होगा, तो कई महत्वपूर्ण विषय चर्चा से छूट सकते हैं। इससे उन लोगों की समस्याएं भी सदन में प्रभावी ढंग से सामने नहीं आ पाएंगी, जो दूरस्थ क्षेत्रों में रहते हैं और अपनी बात सीधे शासन-प्रशासन तक पहुंचाने में कठिनाई महसूस करते हैं।
मनोज तिवारी के अनुसार, विधानसभा की कार्यवाही जितनी व्यापक और सार्थक होगी, उतना ही जनता को इसका लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की समस्याओं को तथ्यों के साथ रखने और उनके समाधान के लिए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।दो दिवसीय विधानसभा सत्र को जनता के पैसे की बर्बादी बताते हुए मनोज तिवारी ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही पर होने वाला खर्च तभी सार्थक माना जा सकता है, जब सदन में जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो और उसके सकारात्मक परिणाम सामने आएं। विधानसभा लोकतंत्र का महत्वपूर्ण संस्थान है और इसकी गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि सदन की कार्यवाही केवल निर्धारित औपचारिकताओं तक सीमित न रहे।उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अपने प्रतिनिधियों को इसलिए चुनती है, ताकि उनकी समस्याओं का समाधान हो और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। ऐसे में विधानसभा सत्र की अवधि और कार्यवाही को इस तरह निर्धारित किया जाना चाहिए कि अधिक से अधिक जनहित के विषयों पर चर्चा हो सके। जनता के धन का सदुपयोग तभी होगा, जब सदन में होने वाली चर्चा का लाभ प्रदेश के लोगों तक पहुंचे।विधायक ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही को प्रभावी बनाने के लिए सरकार को विपक्ष के सुझावों और जनहित से जुड़े सवालों को भी गंभीरता से लेना चाहिए। सदन में उठने वाले सवालों को राजनीतिक विरोध के बजाय जनता की समस्याओं के रूप में देखा जाना चाहिए। इससे न केवल सरकार की जवाबदेही बढ़ेगी बल्कि विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी।मनोज तिवारी ने प्रदेश सरकार से विधानसभा सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सदन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा होनी चाहिए और विपक्ष को जनहित के सवाल उठाने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। विधानसभा का उद्देश्य जनता की आवाज को मजबूती से सामने लाना और सरकार को उसके कार्यों के प्रति जवाबदेह बनाना है।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में विधानसभा सत्र की अवधि प्रदेश की आवश्यकताओं और जनहित के मुद्दों को ध्यान में रखकर निर्धारित की जाए। सदन में होने वाली चर्चा का केंद्र आम जनता की समस्याएं और उनके समाधान होने चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत बना रहे।प्रेस वार्ता के माध्यम से विधायक मनोज तिवारी ने दो दिवसीय सत्र की अवधि पर सवाल उठाते हुए सरकार से जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।उनका कहना था कि जनता की समस्याओं को सुनना, उन्हें सदन में उठाने का अवसर देना और उनके समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। विधानसभा सत्र जितना सार्थक होगा, लोकतंत्र में जनता की भागीदारी और विश्वास उतना ही मजबूत होगा। प्रेस वार्ता में जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह भोज, नगर अध्यक्ष तारा चंद्र जोशी, पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी,आनंद सिंह बगडवाल, गोपाल चौहान आदि लोग मौजूद रहे।

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