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अल्मोड़ा-अल्मोड़ा जिले में मानसखंड विज्ञान केंद्र ने आज दिनांक ०५ जून २०२४ को विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन किया।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पदम् डॉ. ललित पांडे,अध्यक्ष उत्तराखंड सेवा निधि पर्यावरण शिक्षा केंद्र तथा अतिथि सीमा सुरक्षा बल के सेवानिवृत कमांडेंट एम. एस. नेगी थे। अतिथियों के अलावा अल्मोड़ा नगर के विभिन्न महिला समितियों,जनप्रतिनिधि एवं गढ़मान्य व्यक्तियों, विद्यालयों के अध्यापको तथा छात्र – छात्राओं ने कार्यक्रम में भागीदारी की।कार्यक्रम का संचालन श्रीमती तमन्ना बोरा ने किया।डॉ. नवीन चंद्र जोशी, प्रभारी, मानसखंड विज्ञान केंद्र ने अतिथियों तथा प्रतिभागियों का स्वागत किया और यूकॉस्ट तथा मानसखंड विज्ञान केंद्र के बारे में जानकारी दी एवं उत्तराखंड राज्य विज्ञानं एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के विभिन्न उद्देश्यों एवं परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री. पुष्कर सिंह धामी जी एवं यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रोफेसर (डॉ.) दुर्गेश पंत जी के नेत्तृत्व में यूकॉस्ट ने पूरे राज्य में बहुत विस्तार किया है एवं उत्तराखंड पूरे देश में पहला राज्य बनने जा रहा है जिसके हर जिले में एक विज्ञान केंद्र होगा। डा. जोशी ने विज्ञान केंद्रों की उपयोगिता एवं महत्त्व पर जोर देते हुए कहा कि मानसखंड विज्ञान केंद्र पूरे क्षेत्र के सतत विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा एवं आने वाली पीडियों में विज्ञान का संचार करेगा। पर्यावरण दिवस के अवसर पर डॉ. जोशी ने कहा कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और जल संसाधनों का एक महत्वपूर्ण गढ़ है एवं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से तेजी से खतरे में है। बढ़ते तापमान ने हिमनदों के पिघलने की गति बढ़ा दी है, जिससे क्षेत्र के ग्लेशियरों को खतरा है, जो दक्षिण एशिया के लाखों लोगों के लिए मीठे पानी के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। हिमनदों के पीछे हटने से न केवल पानी की आपूर्ति खतरे में पड़ जाती है, बल्कि हिमनद झील में बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले समुदायों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। इसके अलावा, मौसम के बदलते मिजाज के कारण अनियमित वर्षा हुई है, जिससे भूस्खलन और अचानक बाढ़ की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ गई है, जो नाजुक पहाड़ी इलाकों को अस्थिर कर देती है। बदलती जलवायु स्थानीय वनस्पतियों और जीवों को भी बाधित करती है, कई प्रजातियों को विलुप्त होने की ओर धकेलती है और पारिस्थितिकी तंत्र के नाजुक संतुलन को बदल देती है। ये संयुक्त प्रभाव जलवायु परिवर्तन को कम करने और इस संवेदनशील लेकिन महत्वपूर्ण क्षेत्र की रक्षा के लिए व्यापक रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।डॉ. एस. एस. सामंत ने विश्व पर्यावरण दिवस की उत्पत्ति के बारे में बताया। उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस २०२४ के शीर्षक ” भूमि पुनर्स्थापन, मरुस्थलीकरण तथा सूखा प्रतिरोधक क्षमता पर विस्तार में उदाहरण के साथ व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा विश्व पर्यावरण दिवस 2024 भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण और सूखे के लचीलेपन के महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित है, जो पारिस्थितिक तंत्र, आजीविका और वैश्विक खाद्य सुरक्षा को खतरे में डालने वाले बढ़ते पर्यावरणीय संकट से निपटने की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। डॉ. सामंत ने कहा कि सूखा प्रतिरोधक चौड़ी पत्ती वाले पेड़ो को लगाने से भूमि को पुनर्स्थापित किया जा सकता है तथा मरुस्थलीकरण को रोका जा सकता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया की वह इस ज्ञान को जन जन तक पहुंचाए तथा बंजर भूमि को स्थानीय चौड़ी पत्ती वाली प्रजातियों के पेड़ो से पुनर्स्थापित करें। इससे जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद मिलेगी।अतिथि सीमा सुरक्षा बल के सेवानिवृत कमांडेंट एम. एस. नेगी ने छात्रों से पर्यावरण उत्थान तथा वनाग्नि से सुरक्षा के सम्बन्ध पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को याद करते हुए कहा कि पहले की पीड़ी पर्यावरण के प्रति ज्यादा संवेदनशील एवं जागरूक थी। लोग अपने क्षेत्र के जल जंगल और जमीन कि खुद देखभाल करते थे। उन्होंने पेड़ों की उपयोगिता पर जोर देते हुए सभी से जंगलों को बचाने की अपील की। उन्होंने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को याद करते हुए कहा कि पहले की पीड़ी पर्यावरण के प्रति ज्यादा संवेदनशील एवं जागरूक थी। लोग अपने क्षेत्र के जल जंगल और जमीन कि खुद देखभाल करते थे। उन्होंने पेड़ों की उपयोगिता पर जोर देते हुए सभी से जंगलों को बचाने की अपील की। उन्होंने वनाग्नि के रोकथाम एवं वृक्षारोपण पर भी जोर दिया एवं सबसे एक पेड़ लगाने कि अपील की।इसके उपरांत एक खुली चर्चा का भी आयोजन किया गया जिसमे प्रतिभागियों ने अल्मोड़ा शहर के पर्यावरणीय समस्याओ पर प्रकाश डाला एवं आवश्यक सुधारों पर जोर दिया। डॉ. वसुधा पंत ने वनाग्नि से वनो को होने वाले नुक्सान तथा पारिस्थिकी को होने वाले नुक्सान के सम्बन्ध में अपनी बात कही। उन्होंने कहा की जंगलो में लगने वाली आग जमीन के अंदर के जल स्तर को भी कम करती है। नौले और धारे सूख रहे हैं तथा उनको बचाने के लिए पेड़ लगाने की आवशयकता है उन्होंने प्लास्टिक वेस्ट को भी कम करने की बात कही। इस अवसर पर श्रीमती लता बोरा, अध्यक्ष उल्का सोसाइटी ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतीय हिमालय में बसा उत्तराखंड, जलवायु परिवर्तन के कारण गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जो इसके नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और उस पर निर्भर समुदायों को प्रभावित कर रहा है। अब हमें समस्या उन्मुख नहीं बल्कि समाधान उन्मुख होने की जरूरत है चर्चा के दौरान श्रीमती राधा बिष्ट,श्रीमती लता तिवारी,श्रीमती लीला बोरा,श्रीमती मीणा भैसोड़ा, पारु उप्रेती, श्रीमती गीता मेहरा, श्रीमती राजेश्वरी, श्रीमती अमीता शाह, श्रीमती प्रेमा मेर, श्रीमती हीरा कनवाल, नेहा उप्रेती, माला देवी, श्री भूपेंद्र वल्दिया, एवं केंद्रीय विद्यालय की अध्यापिका श्रीमती शिल्पा जोशी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये। श्रीमती लता पांडे तथा श्रीमती राधा तिवारी ने गीत के माध्यम से अपने विचार लोगो के सम्मुख रखे।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पदम् ललित पण्डे ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमें पर्यावरण दिवस २०२४ के विषय को गंभीरता से समझने कि आवशयकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सेवा निधि स्कूलो में तथा अन्य जनता में शिक्षा का प्रचार प्रसार कर रहा है। हम सभी लोगो को भी उपरोक्त विषय कि जानकारी जन – जन तक पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए तथा उपयोगी वृक्ष लगाकर पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्धन में अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण के सुधारों के बारे में सब चर्चा करते हैं पर अब इस बात पर विचार करने कि आवश्यकता है कि ये सुधार कौन लाएगा एवं हम इसमें क्या योगदान दे रहे हैं। उन्होंने बच्चो से पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने का आवाहन किया। उन्होंने युवाओ से पर्यावरण से बचाने की अपील की।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि द्वारा मानसखंड विज्ञान केंद्र में आयोजित पहले समर कैंप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को भी पुरुस्कृत किया गया। लिटिल साइंटिस्ट में वर्धा बिष्ट एवं ध्रुवं जोशी को, रोबोटिक्स और कोडिंग में दर्श सिंह किरोला एवं राघव भट्ट को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत किया गया।कार्यक्रम के अंत में मानसखंड विज्ञान केंद्र की ओर से प्रदीप तिवारी ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में मानसखंड विज्ञान केंद्र के शिवम् पंत, मनीष पालीवाल, भास्कर देवड़ी, संजय कनवाल, पारस कुमार, उमेश बिष्ट, मोहन सिंह सिंह नेगी, धर्मेंद्र सिंह जीना, सोहैल सिंह कनवाल, सनी एवं अंकित कुमार आदि ने कार्यक्रम में सहयोग किया।

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