

अल्मोड़ा-अल्मोड़ा विधायक मनोज तिवारी ने प्रेस वार्ता करते हुए पेपर लीक प्रकरण को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल परीक्षा व्यवस्था पर ही नहीं,बल्कि लाखों मेहनती युवाओं और उनके परिवारों की उम्मीदों पर भी चोट करती हैं।उन्होंने कहा कि अभिभावक बड़ी कठिनाइयों और आर्थिक चुनौतियों के बीच अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं, जबकि छात्र-छात्राएं दिन-रात मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो जाए तो सबसे अधिक नुकसान उन युवाओं का होता है जिन्होंने ईमानदारी से मेहनत की होती है।मनोज तिवारी ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं से युवाओं का मनोबल टूटता है और उनका व्यवस्था पर से विश्वास भी डगमगा जाता है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के भविष्य और युवाओं के विश्वास का प्रश्न है। इसलिए सरकार को इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेना चाहिए।विधायक तिवारी ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राएं किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं थे,बल्कि अपने भविष्य और न्याय की लड़ाई लड़ रहे युवा थे।उन्होंने कहा कि छात्रों ने पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद की और एक व्यापक आंदोलन खड़ा किया।उन्होंने कहा कि जब परीक्षा की गोपनीयता भंग हुई और पेपर लीक का मामला सामने आया तो युवाओं ने स्वाभाविक रूप से विभाग के सर्वोच्च जिम्मेदार व्यक्ति होने के नाते केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की।यह मांग किसी राजनीतिक कारण से नहीं बल्कि जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से उठाई गई थी।मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि छात्रों की मांग सुनने के बजाय सरकार ने उनके आंदोलन को दबाने का प्रयास किया।उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्र-छात्राओं के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया और उन पर लाठीचार्ज किया गया वह बेहद अमानवीय और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ था।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है।यदि देश का युवा अपने भविष्य को लेकर सवाल पूछ रहा है तो सरकार का दायित्व उसकी बात सुनना है न कि उस पर बल प्रयोग करना। उन्होंने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।विधायक तिवारी ने कहा कि सरकार लंबे समय तक इस मुद्दे पर हठधर्मिता अपनाए रही लेकिन अंततः युवाओं के व्यापक संघर्ष और दबाव के सामने उसे पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा युवाओं के संघर्ष और लोकतांत्रिक आंदोलन की बड़ी जीत है।उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम साबित करता है कि यदि युवा संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखते हैं तो सत्ता को भी उनकी आवाज सुननी पड़ती है। उन्होंने इसे देशभर के छात्रों और युवाओं की जीत बताते हुए कहा कि यह आंदोलन आने वाले समय में युवाओं को अपने अधिकारों के प्रति और अधिक जागरूक करेगा।प्रेस वार्ता के दौरान मनोज तिवारी ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं और उसके बाद सरकार की कार्यप्रणाली ने केंद्र सरकार की छवि पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। उन्होंने
कहा कि युवाओं को रोजगार और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था का भरोसा देने वाली सरकार इन मामलों में पूरी तरह विफल साबित हुई है।उन्होंने कहा कि यदि समय रहते परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी नहीं बनाया गया तो लाखों युवाओं का भविष्य लगातार संकट में रहेगा।सरकार को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे प्रश्नपत्रों की गोपनीयता किसी भी स्तर पर भंग न हो और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो।विधायक मनोज तिवारी ने केंद्र और प्रदेश सरकार से मांग की कि भविष्य में आयोजित होने वाली सभी प्रतियोगी एवं शैक्षणिक परीक्षाओं की गोपनीयता बनाए रखने के लिए प्रभावी और सख्त व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाए तथा दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की मेहनत और सपनों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।सरकार की पहली जिम्मेदारी निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली उपलब्ध कराना है ताकि मेहनत करने वाले युवाओं को उनका अधिकार मिल सके और उनका भविष्य सुरक्षित रह सके। प्रेस वार्ता में कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह भोज, महानगर अध्यक्ष तारा चंद्र जोशी, महिला जिलाध्यक्ष राधा बिष्ट, पूर्व दर्जा मंत्री पूरन रौतेला, कांग्रेस ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष पारस नाथ गोस्वामी,सहकारिता प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष हर्ष कनवाल आदि उपस्थित रहे।
