

अल्मोड़ा-राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार एवं राज्य स्वच्छ गंगा मिशन,नमामि गंगे उत्तराखण्ड के संयुक्त तत्वावधान में के योग विज्ञान विभाग द्वारा सिमखनी खेल मैदान में आओ हम सब योग करें अभियान का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। यह अभियान 21 मई से 21 जून तक नियमित रूप से संचालित किया जाएगा,जिसके अंतर्गत योग विज्ञान विभाग के विद्यार्थी उत्तराखण्ड के समस्त जनपदों के साथ-साथ भारत के विभिन्न राज्यों में निःशुल्क योग प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम स्वास्थ्य, मज्ञान और विश्व शांति के लिए योग के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी,शोधार्थी एवं योग साधक उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंगलाचरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।कार्यक्रम का संचालन डॉ गिरीश अधिकारी द्वारा प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी शैली में किया गया।उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं,बल्कि मानसिक शांति,आत्मिक जागरूकता एवं विश्व बंधुत्व का आधार है।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो प्रवीण बिष्ट निदेशक परिसर रहे।उन्होंने अपने उद्बोधन में योग को वेदों एवं उपनिषदों की अमूल्य देन बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं,बल्कि जीवन को अनुशासित,संतुलित एवं आध्यात्मिक बनाने की महान पद्धति है।उन्होंने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों ने वेदों और पुराणों के माध्यम से योग का संदेश सम्पूर्ण मानवता को दिया, जिसका महत्व आज पूरे विश्व ने स्वीकार किया है।उन्होंने विद्यार्थियों से योग को अपनी दिनचर्या में अपनाने का आह्वान किया।विशिष्ट अतिथि प्रो शेखर जोशी,अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि योग भारतीय सभ्यता और सनातन ज्ञान परंपरा की पहचान है।उन्होंने पुराणों एवं प्राचीन ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि योग मनुष्य को आत्मिक शांति,मानसिक संतुलन एवं सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में योग विश्व शांति,स्वस्थ समाज और मानव कल्याण का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है तथा युवाओं को योग के माध्यम से अपनी संस्कृति और मूल्यों से जुड़ना चाहिए।कार्यक्रम की अध्यक्षता योग विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ नवीन चंद भट्ट ने की।अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री द्वारा योग के क्षेत्र में किए जा रहे सराहनीय कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि आज योग भारत की प्राचीन संस्कृति से निकलकर सम्पूर्ण विश्व की आवश्यकता बन चुका है।उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा 21 मई से 21 जून तक विभिन्न स्थानों पर निःशुल्क योग शिविरों का आयोजन किया जाएगा,जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग को लाभ प्राप्त होगा।इस अवसर पर विभाग के शिक्षक डॉ लल्लन कुमार सिंह ने कहा कि जिस प्रकार गंगा मानव जीवन को पवित्रता एवं ऊर्जा प्रदान करती है उसी प्रकार योग मनुष्य के तन,मन और आत्मा को निर्मल बनाता है।उन्होंने नमामि गंगे अभियान को स्वच्छता,जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।हेमलता अवस्थी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं,बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था की जीवनरेखा है। उन्होंने कहा कि योग और गंगा दोनों मानव जीवन में शुद्धता, संतुलन और सकारात्मकता का संदेश देते हैं तथा युवाओं को पर्यावरण संरक्षण एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक होना चाहिए।योग के शोधार्थी दीपक परिहार ने कहा कि नमामि गंगे और योग अभियान दोनों का उद्देश्य समाज में जागरूकता एवं सकारात्मक परिवर्तन लाना है।उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गंगा करोड़ों लोगों के जीवन को जोड़ती है, उसी प्रकार योग सम्पूर्ण मानवता को एकता,स्वास्थ्य और शांति के सूत्र में बांधने का कार्य करता है।कार्यक्रम में योग विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक योगाभ्यास एवं योग प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा।साथ ही विद्यार्थियों द्वारा पिछले वर्ष संचालित निःशुल्क योग शिविरों के प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।कार्यक्रम में योग विज्ञान विभाग के विद्यार्थीहर्षिता,नेहा,गीतांजलि,किरण,आदित्य,हेमलता,सौरव,अनुराधा,नीतू,उमर,प्रेम,दिव्या,ललित,योगेश,मोहित,हरदीप,जानकी,खुशी,निशा बिष्ट,मीना,चेतना,कमलेश, रिया,निधि,पूजा,प्रियंका,बेबी, निकिता,भावना,रितु,कमला, रोशनी,बसंती,ज्योति,संध्या, अंकुर,योगिता,प्रीति,सुंदर, अंजलि,यामिनी,आशीष, पंकज,केशव,अभय,जया, खुशीता आदि उपस्थित रहे।उल्लेखनीय है कि योग विज्ञान विभाग द्वारा वर्ष 2015 से लगातार यह अभियान संचालित किया जा रहा है जिसके माध्यम से देश-विदेश के लाखों लोग लाभान्वित हो चुके हैं।कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं विश्व शांति की कामना के साथ हुआ।
