अल्मोड़ा-उत्तराखंड क्रांति दल में संगठनात्मक असहमति के बीच बुधवार को 15 पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की।अल्मोड़ा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पदाधिकारियों ने संगठन की कार्यप्रणाली, निर्णय प्रक्रिया,अनुशासन और नियमों को लेकर अपनी असहमति सामने रखी। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।इस्तीफा देने वालों में जिला उपाध्यक्ष विनोद बिष्ट, जिला महामंत्री सचिन जोशी, जिला अध्यक्ष रघुवर भाकुनी, कार्यकारी अध्यक्ष पवन लतवाल, केंद्रीय संगठन मंत्री नरेंद्र सिंह बिष्ट, मंडल उपाध्यक्ष नीरज सिंह मेहता, मंडल अध्यक्ष पंकज सिंह बिष्ट, बागेश्वर जिला महामंत्री पंकज भट्ट, जिला महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष दीपा जोशी, संगठन मंत्री प्रियंका बिष्ट, कोषाध्यक्ष किरण मेहरा, शिलमोड़ा की उपाध्यक्ष आरती आर्य, उपाध्यक्ष मनीषा नेगी, शिलमोड़ा महिला प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष सरस्वती आर्य तथा हवालबाग से सुंदर सिंह शामिल हैं।प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिमांशु बिष्ट, गोपाल सिंह बिष्ट, मुकेश सिंह बिष्ट, सोनू नेगी, पूरन सिंह बिष्ट, निर्मल रजवार, सागर कठायत, योगेश पांडे, मोहित कठायत, शेखर कुमार, सचिन राणा, हेमू कनवाल, ललित सिंह, दिव्या, नीतू, प्रियंका, राहुल बिष्ट, नरेंद्र बिष्ट, शंकर मेहरा और खड़क राणा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं समर्थक मौजूद रहे।इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों ने कहा कि उनका निर्णय किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि संगठनात्मक कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न असहमति के कारण लिया गया है। उन्होंने कहा कि संगठन में पदाधिकारियों के अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट होनी चाहिए तथा निर्णय संगठन के नियम और संविधान के अनुरूप लिए जाने चाहिए।पदाधिकारियों ने कहा हम किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं हैं।हमारा सवाल संगठन की व्यवस्था और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर है। व्यक्ति से ऊपर संगठन और रिश्तों से ऊपर नियम एवं संविधान होना चाहिए।केंद्रीय संगठन मंत्री रहे नरेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि संगठन के भीतर रहते हुए अपनी बात रखने और समाधान निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन अपेक्षित स्पष्टता नहीं बनने पर उन्होंने टकराव के बजाय अलग रास्ता चुनने का निर्णय लिया।उन्होंने कहा हम दीवार में धक्का मारते नहीं रहना चाहते। हमारा उद्देश्य संघर्ष को बढ़ाना नहीं, बल्कि अपने विचार और उत्तराखंड के मुद्दों के लिए एक नया रास्ता चुनना है।पदाधिकारियों ने कहा कि आगे की राजनीतिक दिशा को लेकर कार्यकर्ताओं से संवाद जारी रहेगा। साथ ही जल, जंगल और जमीन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन तथा पहाड़ के अधिकार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

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