



अल्मोड़ा-स्वतंत्रता दिवस का दिन खत्याड़ी क्षेत्र के तीन जरूरतमंद परिवारों के लिए उस समय यादगार बन गया, जब लंबे समय से जर्जर मकानों में रहने की मजबूरी से उन्हें राहत मिली।प्लस अप्रोच फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे ‘सपनों का घर, जिससे लोगों के चेहरे पर मुस्कान आए’ अभियान के तहत तीन परिवारों के मकानों का जीर्णोद्धार कर उन्हें सुरक्षित और बेहतर आशियाना उपलब्ध कराया गया।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने इन मकानों को लाभार्थियों को सौंपा।यह पहल केवल तीन मकानों के जीर्णोद्धार तक सीमित नहीं है, बल्कि उन परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और उम्मीद लौटाने की कोशिश है, जिनके लिए अपने घर की मरम्मत कराना आसान नहीं था। जर्जर दीवारों और असुरक्षित परिस्थितियों के बीच जीवन गुजार रहे परिवारों के लिए अपने घर को फिर से सुरक्षित रूप में पाना किसी सपने के सच होने से कम नहीं रहा।प्लस अप्रोच फाउंडेशन का ‘सपनों का घर’ अभियान समाजसेवा के उस मानवीय पक्ष को सामने लाता है, जिसमें सहायता केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहती, बल्कि किसी व्यक्ति को सम्मान के साथ सुरक्षित जीवन जीने का अवसर देने का प्रयास किया जाता है।खत्याड़ी में तीन परिवारों के जर्जर मकानों का जीर्णोद्धार इसी सोच का परिणाम है। मकानों के सुधरने के बाद लाभार्थियों के चेहरों पर आई खुशी इस पूरे अभियान की सफलता की सबसे बड़ी तस्वीर बनी। जिन घरों में कभी जर्जर छत, दीवारों और अन्य समस्याओं को लेकर चिंता रहती थी, वहां अब परिवारों को अपेक्षाकृत सुरक्षित वातावरण मिला है।संस्था की इस पहल ने यह संदेश भी दिया कि समाज में यदि सक्षम लोग और संस्थाएं जरूरतमंदों की समस्याओं को अपनी जिम्मेदारी समझकर आगे आएं तो बदलाव निश्चित रूप से संभव है।जिलाधिकारी के मार्गदर्शन ने दी पहल को मजबूती
फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि इस पुनीत कार्य को पूरा करने में जिलाधिकारी का मार्गदर्शन और दिशा-निर्देश प्राप्त हुआ। जिलाधिकारी ने संस्था द्वारा किए जा रहे इस कार्य की सराहना करते हुए पदाधिकारियों और सदस्यों को धन्यवाद दिया।उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए किए जा रहे ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं। उन्होंने संस्था से भविष्य में भी इसी प्रकार जरूरतमंद परिवारों को सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया।जिलाधिकारी की ओर से संस्था के प्रयास की सराहना किए जाने से फाउंडेशन से जुड़े सदस्यों का उत्साह भी बढ़ा। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं के बीच इस तरह का समन्वय जनहित के कार्यों को और प्रभावी बना सकता है।इन तीनों भवनों के जीर्णोद्धार एवं निर्माण कार्य को मनोज सनवाल के दिशा-निर्देशन में पूरा किया गया। फाउंडेशन की टीम और सहयोगियों ने योजना को धरातल पर उतारने के लिए लगातार प्रयास किए।इस कार्य में शामिल लोगों ने इसे केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना से जुड़ा अभियान बताया। उनका कहना है कि किसी जरूरतमंद परिवार के लिए घर केवल चार दीवारों का नाम नहीं होता, बल्कि वह उसके परिवार की सुरक्षा, सम्मान और भविष्य से जुड़ा होता है।प्लस अप्रोच फाउंडेशन की इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि संस्था ने जरूरतमंद परिवारों की वास्तविक आवश्यकता को समझते हुए सीधे उनके जीवन से जुड़ी समस्या का समाधान करने का प्रयास किया।आज जब समाज में समाजसेवा के अनेक रूप देखने को मिलते हैं, ऐसे समय में किसी परिवार के जर्जर घर को सुरक्षित बनाना एक दीर्घकालिक और प्रभावी सहयोग माना जा सकता है। इससे लाभार्थियों को केवल तत्काल राहत नहीं मिलती, बल्कि लंबे समय तक उसका लाभ उनके परिवार को मिलता रहेगा।क्षेत्रवासियों ने भी फाउंडेशन के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि समाजसेवा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उसका लाभ उस व्यक्ति तक पहुंचे जिसे वास्तव में इसकी आवश्यकता है। खत्याड़ी में तीन परिवारों के लिए किया गया यह कार्य इसी भावना का उदाहरण है।सपनों का घर, जिससे लोगों के चेहरे पर मुस्कान आए’ अभियान का नाम ही इस पहल की भावना को स्पष्ट करता है। तीनों परिवारों को मकान सौंपे जाने के दौरान उनके चेहरों पर दिखाई दी खुशी इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।किसी जरूरतमंद परिवार को सुरक्षित घर उपलब्ध कराने से उसके भीतर भविष्य को लेकर विश्वास पैदा होता है। बच्चों के लिए बेहतर वातावरण, बुजुर्गों के लिए सुरक्षा और परिवार के लिए सम्मान—एक सुरक्षित घर इन सभी जरूरतों को पूरा करता है।यही कारण है कि प्लस अप्रोच फाउंडेशन की इस पहल को केवल भवन निर्माण या मरम्मत का कार्य नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।समाज के लिए प्रेरणा बन रही प्लस अप्रोच की पहल प्लस अप्रोच फाउंडेशन ने यह साबित किया है कि यदि सामाजिक संस्थाएं अपने संसाधनों और सामर्थ्य का सही दिशा में उपयोग करें तो जरूरतमंद परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। तीन परिवारों को सुरक्षित आशियाना उपलब्ध कराना भले ही संख्या में छोटा प्रयास दिखाई दे, लेकिन जिन परिवारों के जीवन में इसका असर पड़ा है, उनके लिए इसका महत्व बहुत बड़ा है।
इस पहल की खास बात यह भी है कि इसमें प्रशासनिक मार्गदर्शन और सामाजिक संस्था के प्रयासों का बेहतर समन्वय देखने को मिला। जिलाधिकारी के दिशा-निर्देशों के साथ फाउंडेशन की टीम ने कार्य को आगे बढ़ाया और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसे पूरा कर लाभार्थियों को उनके घर सौंपे गए।स्वतंत्रता दिवस पर जब देश आजादी का पर्व मना रहा था, उसी दिन तीन परिवारों को असुरक्षित और जर्जर मकानों से राहत मिलना इस पहल को और भी भावनात्मक बना गया। उनके लिए यह दिन केवल राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि अपने जीवन में एक नई शुरुआत का दिन भी बन गया।फाउंडेशन से जुड़े लोगों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल मकानों का जीर्णोद्धार करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए बेहतर परिस्थितियां उपलब्ध कराना है। भविष्य में भी संस्था ऐसे जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचने और उनकी क्षमता के अनुसार सहयोग करने के लिए प्रयासरत रहेगी।क्षेत्रवासियों ने कहा कि प्लस अप्रोच फाउंडेशन की पहल अन्य सामाजिक संस्थाओं और सक्षम लोगों के लिए भी प्रेरणा है। यदि समाज के अलग-अलग वर्ग इसी तरह जरूरतमंदों के साथ खड़े हों तो अनेक परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।उन्होंने संस्था से भविष्य में भी इस अभियान को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई, ताकि अल्मोड़ा जिले के अन्य जरूरतमंद परिवारों को भी इसका लाभ मिल सके।इस पुनीत कार्य में आशीष वर्मा, ललित लटवाल, रवि रौतेला, बी.एस. मनकोटी, डॉ. जी.सी. दुर्गापाल, गिरीश खोलिया, विनीत बिष्ट, अमित साह मोनू, अभिषेक जोशी, मनोज भंडारी, हरीश कनवाल, आनंद कनवाल, राजेश भोज सहित अनेक लोगों का सहयोग रहा।फाउंडेशन की पूरी टीम ने इस पहल को सफल बनाने में योगदान दिया। क्षेत्रवासियों ने सभी सहयोगियों का आभार जताते हुए कहा कि इस तरह के कार्य समाज में संवेदनशीलता, सहयोग और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं।प्लस अप्रोच फाउंडेशन का ‘सपनों का घर’ अभियान आज उन तीन परिवारों के लिए उम्मीद का घर बन चुका है। जरूरतमंदों के जीवन में खुशियां और सुरक्षा लौटाने वाली यह पहल निश्चित रूप से समाजसेवा की एक प्रेरणादायी मिसाल है।
