अल्मोड़ा-विरासत हमर अल्मोड़ा की ओर से आज 12 अगस्त को उत्तरांचल राज्य के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधेयक पारित होने की 35वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रेस वार्ता एवं मिष्ठान वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।इस अवसर पर पृथक पर्वतीय राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दिवंगत नेताओं एवं पूर्व विधायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा वरिष्ठ भाजपा नेताओं एवं पूर्व पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया।प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विरासत हमर अल्मोड़ा के संयोजक राजीव गुरुरानी ने कहा कि वर्ष 1989 तक उत्तराखंड क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक स्थिति बेहद कमजोर थी।कई स्थानों पर भाजपा प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो जाती थी।उन्होंने कहा कि वर्ष 1990 में राम मंदिर आंदोलन के साथ पृथक पर्वतीय राज्य की मांग को भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय एजेंडे में प्रमुखता से शामिल किया। इसके बाद वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड क्षेत्र की 19 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 17 सीटों पर विजय प्राप्त की।राजीव गुरुरानी ने कहा कि 12 अगस्त 1991 को तत्कालीन अल्मोड़ा विधायक पुरानचंद शर्मा की पहल पर उत्तर प्रदेश विधानसभा में उत्तरांचल राज्य का विधेयक पारित हुआ।यह दिन पृथक राज्य आंदोलन की संवैधानिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।इसी संघर्ष और लंबी राजनीतिक प्रक्रिया के परिणामस्वरूप 9 नवंबर 2000 को उत्तरांचल, वर्तमान उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ।उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर विरासत हमर अल्मोड़ा द्वारा राज्य आंदोलन एवं राज्य निर्माण में योगदान देने वाले दिवंगत पूर्व विधायकों एवं नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वहीं जीवित पूर्व विधायकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें धन्यवाद-पत्र भी प्रेषित किए गए।कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता रणजीत सिंह भंडारी, श्रीमती लता वोहरा एवं पुष्कर सिंह नेगी को सम्मानित किया गया।इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता रणजीत सिंह भंडारी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने जनता की भावनाओं के अनुरूप पृथक राज्य की मांग को सड़क से लेकर संसद तक पहुंचाने का कार्य किया।भाजपा के विधायकों एवं सांसदों ने इस जनभावना को राजनीतिक और संवैधानिक स्वरूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि 12 अगस्त 1991 राज्य निर्माण की संवैधानिक यात्रा का प्रथम महत्वपूर्ण पड़ाव था। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे स्वयं उस ऐतिहासिक दिन उत्तर प्रदेश विधानसभा की दर्शक दीर्घा में उपस्थित थे। उस दिन को याद कर आज भी गर्व की अनुभूति होती है।श्रीमती लता वोहरा ने सम्मान के लिए विरासत हमर अल्मोड़ा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण लंबे जनसंघर्ष, जनभावनाओं और अनेक आंदोलनकारियों के त्याग एवं संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण आंदोलन से जुड़े सभी आंदोलनकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ नेताओं के योगदान को सदैव स्मरण किया जाना चाहिए। 12 अगस्त का दिन इस ऐतिहासिक संघर्ष की संवैधानिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।पुष्कर सिंह नेगी ने कहा कि पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग केवल राजनीतिक विषय नहीं थी, बल्कि यह पर्वतीय क्षेत्र की जनता की वर्षों पुरानी भावनाओं और आकांक्षाओं से जुड़ा आंदोलन था। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों और जनप्रतिनिधियों के योगदान को सम्मान देना गौरव की बात है। उन्होंने विरासत हमर अल्मोड़ा द्वारा आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी ऐतिहासिक विरासत और संघर्ष की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों के बीच मिष्ठान वितरण भी किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण लंबे जनसंघर्ष, जनभावनाओं और अनेक आंदोलनकारियों के त्याग एवं योगदान का परिणाम है। ऐसे ऐतिहासिक प्रसंगों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी का दायित्व है।इस अवसर पर मनोज सिंह रावत, ईश्वर उपाध्याय, कृष्ण तिलारा, मनीष जोशी, धर्मेन्द्र बिष्ट, इंदर सिंह नेगी, दिनेश मठपाल, कमलेश सनवाल, हरीश जीना सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहे।

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