
अल्मोड़ा-नगर के रानीधारा स्थित प्रसिद्ध श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धालु श्रीकृष्ण की भक्ति के रस में सराबोर नजर आए। कथा व्यास आचार्य पं. पंकज जोशी ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण सोलह कलाओं में निपुण थे और उनके जीवन में ज्ञान, कर्म, प्रेम, करुणा तथा धर्म का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। आज भी प्रत्येक मानव जीवन में भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद का महत्व है। आवश्यकता इस बात की है कि हम उनके जीवन से जुड़े बहुमूल्य आदर्शों को पहचानें और उन्हें अपने जीवन में उतारें।कथा के दौरान आचार्य पं. पंकज जोशी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल्यकाल की नटखट एवं मनमोहक लीलाओं का संगीतमयी प्रस्तुतीकरण किया। कृष्ण की बाल लीलाओं के भावपूर्ण वर्णन और संगीत ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा कथा परिसर कृष्ण भक्ति के जयकारों और भजनों से गूंज उठा तथा श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए।
कथा में नगर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।कथा आयोजक पं. हरीश चंद्र जोशी ने बताया कि 10 अगस्त, सोमवार को श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत समापन होगा। इस अवसर पर पूर्णाहुति, हवन अनुष्ठान, यज्ञ परायण एवं महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इसके उपरांत दोपहर 2 बजे से महाभंडारे का शुभारंभ होगा। उन्होंने नगरवासियों एवं समस्त श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा के समापन समारोह में शामिल होने और प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित करने का आह्वान किया।
