



अल्मोड़ा-चंद्रशेखर घोडके वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अल्मोड़ा के निर्देशन में जनपद पुलिस द्वारा कानून व्यवस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य किया जा रहा है।इसी क्रम में सीओ अल्मोड़ा/रानीखेत बलवन्त सिंह रावत के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली रानीखेत के नेतृत्व में नव नियुक्त चौकी प्रभारी मजखाली उपनिरीक्षक विनोद फर्त्याल की सतर्कता और संवेदनशीलता ने एक ऐसे परिवार की वर्षों पुरानी उम्मीद को फिर से जगा दिया, जिसने 10 वर्ष पहले अपने सदस्य के मिलने की आस लगभग छोड़ दी थी।मानसिक रूप से अस्वस्थ एक व्यक्ति जो लगभग 10 वर्ष से ताड़ीखेत व मजखाली क्षेत्र में इधर-उधर भटकते हुए जीवन व्यतीत कर रहा था।स्थानीय लोग उसे जानते थे परन्तु वास्तविक पहचान किसी को ज्ञात नही थी।चौकी प्रभारी द्वारा व्यक्ति को चौकी लाकर धैर्यपूर्वक पूछताछ की,साथ ही नेटग्रिड पोर्टल के माध्यम से भी उसकी पहचान का प्रयास किया गया,किन्तु गुमशुदगी अत्यंत पुरानी होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी।व्यक्ति को लिखने के लिए डायरी दी गई,जिसमें उसने राजेपुर शब्द लिखा। इसी सुराग/स्थान के आधार पर थाना राजेपुर जनपद फर्रुखाबाद (उ.प्र.) से संपर्क किया गया।फोटो सत्यापन के बाद लगभग चार दिन में उसकी पहचान श्याम सिंह पुत्र फेरू सिंह (51 वर्ष), निवासी ग्राम राजेपुर राठौड़ी, थाना राजेपुर जनपद फर्रुखाबाद के रूप में हुई।दिनांक 6 अगस्त को उसका पुत्र अमित सिंह एवं अन्य परिजन मजखाली चौकी पहुंचे।उन्होंने बताया कि मानसिक स्थिति खराब होने के बाद श्याम सिंह घर से लापता हो गए थे और वर्षों की तलाश के बाद भी उनका कोई पता नहीं चला था।करीब एक दशक बाद श्याम सिंह को देखकर परिजनों की आंखें नम हो गईं।परिजनों ने अल्मोड़ा पुलिस एवं उत्तराखंड पुलिस की संवेदनशील कार्यप्रणाली की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए हृदय से आभार व्यक्त किया।
