अल्मोड़ा-पर्यावरणीय बदलाव भविष्य की गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा कर रहा है।प्रदेश में बढ़ रही बेरोजगारी और नशाखोरी भी चिंता का कारण हैं।चिपको,जल,जंगल,जमीन और शराब नहीं,रोजगार दो आदि आंदोलन की वर्तमान समय में अधिक प्रासंगिकता है। समस्याओं के समाधान को समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा।पूर्व विधायक कांग्रेस नेता नारायण पाल में पत्रकार वार्ता में यह बात कही।उन्होंने कहा प्रकृति से लगातार हो रही छेड़छाड़ प्राणी मात्र पर संकट का कारण बन रही है।उत्तराखंड प्रकृति संरक्षण को लेकर काफी संवेदनशील रहा है। 80 के दशक में पेड़ों को काटने से बचाने को यहां चला चिपको आंदोलन पर्यावरणीय दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। जल, जंगल और जमीन का मुद्दा उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और अन्य कारणों से राज्य में पलायन तेजी से बढ़ रहा है। सरकार द्वारा पलायन आयोग के गठन के बाद भी सकारात्मक परिणाम नहीं मिले हैं। गांव तेजी से खाली हो रहे हैं। इन समस्याओं निस्तारण को सरकार के साथ ही समाज के हर वर्ग को आगे आना चाहिए।पूर्व विधायक नारायण पाल ने राष्ट्रीय राजमार्ग 109 में क्वारब के पास क्षतिग्रस्त सड़क का 2 वर्ष बाद भी सुधार नहीं होने पर नाराजगी जताई। कहा क्वारब की पहाड़ी और कैंची धाम में घंटों तब लग रहे जाम से यात्री परेशान हैं।पर्यटकों के नहीं पहुंचे पर्यटन व्यवसाय को काफी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री अजय टम्टा अल्मोड़ा के सांसद भी हैं।लंबे समय तक मार्ग की बदहाली से केन्द्रीय राज्यमंत्री की साख पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है।सोमेश्वर विधानसभा सीट से उनके भतीजे की दावेदारी के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया।पत्रकार वार्ता में महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष राधा बिष्ट,नगर अध्यक्ष ताराचंद्र जोशी आदि मौजूद थे।
