अल्मोड़ा-विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जी आई एस एवं रिमोट सेंसिंग विभाग,सोबन सिंह जीना परिसर अल्मोड़ा में अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया।इस अतिथि व्याख्यानमाला के मुख्य अतिथि के रूप में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट,विषय विशेषज्ञ रूप में विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ मनोज कुमार,विशिष्ट अतिथि रूप में प्रो. जीवन सिंह रावत (सलाहकार एवं विजिटिंग प्रोफेसर एन आर डी एम एस केंद्र सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा), विशिष्ट अतिथि प्रो अनिल कुमार यादव,कार्यक्रम के संयोजक और जी.आई.एस एवं रिमोट सेंसिंग के निदेशक डॉक्टर दीपक उपस्थित रहे।अपने अतिथि व्याख्यान में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर मनोज कुमार ने ड्रोन तकनीक द्वारा वनाग्नि रोकने के उपायों पर चर्चा की।उन्होंने बताया कि ड्रोन तकनीक से हम जल रहे जंगलों की स्थिति,उनका मानचित्र एवं कई महत्वपूर्ण आंकड़ों को संकलित कर सकते हैं।उन्होंने जिओ इंफॉर्मेटिक्स साइंस के महत्व पर बल दिया। उन्होंने इस तकनीक का फसल,उर्वरक आदि की मात्रा के अनुमान लगाने,कृषि बागवानी में करने की बात कही। उन्होंने ड्रोन के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी।विशिष्ट अतिथि रूप में सलाहकार एवं विजिटिंग प्रोफेसर एन आर डीएम एस केंद्र, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के प्रोफेसर जीवन सिंह रावत ने ड्रोन को एक कारगर एवं उपयोगी तकनीक बताया। उन्होंने बताया कि ड्रोन तकनीक के एप्लीकेशन कृषि, बागवानी, जल संरक्षण आदि के आंकड़ों को एकत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है जिसके बारे में जनसमाज और विद्यार्थियों को बताए जाने की जरूरत है।ड्रोन को लेकर उन्होंने कहा कहा कि भौगोलिक सूचना विज्ञान में आंकड़ों को संकलित करने के लिए ड्रोन एक नवीन तकनीक है। जिसका उयोग पर्यावरण के विभिन्न घटकों जैसे भूमि,जल आदि के विभिन्न पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।इसका उपयोग सबसे पहले रक्षा क्षेत्र में किया गया।हमारे देश में कृषि के विभिन्न कार्यों को संपादित करने के लिए किया जाता है।विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर चर्चा की। पर्यावरण संरक्षण को एक गंभीर विषय बताते हुए इसके संरक्षण के उपायों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में ड्रोन तकनीक का प्रयोग महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए द्रोण के उपयोग और नवीन तकनीकों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही। उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय में इस तरह के तकनीकी विषय पाठ्यक्रम में शामिल किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य निर्माण हो। उन्होंने व्याख्यानमाला के आयोजकों को बधाइयाँ दी।विशिष्ट अतिथि रूप में वानिकी विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ए.के. यादव ने वनाग्नि रोकने में द्रोण तकनीक के प्रयोग को लेकर जानकारी दी।उन्होंने जंगलों की स्थिति और विस्तार को जानने के लिए ड्रोन तकनीक को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही उन्होंने व्याख्यानमाला को महत्वपूर्ण बताते हुए सराहना की।व्याख्यानमाला के संयोजक एवं जीआईएस एंड रिमोट सेंसिंग के निदेशक डॉक्टर दीपक ने पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि नवीन पाठ्यक्रम में ड्रोन तकनीक को शामिल किया गया है,ताकि परंपरागत विषयों में तकनीकी विषयों को शामिल कर शोध कार्यों को और अधिक वैज्ञानिकता प्रदान की जा सके।कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर सरिता पालनी ने किया।इस अवसर पर डॉक्टर हिमानी बिष्ट ने व्यवस्थाएं सुनिश्चित की और सहयोग दिया। व्याख्यानमाला में डॉ ललित जोशी, मनोज, दीक्षिता, ललित सिंह, निशा टम्टा, जीआईएस एंड रिमोट सेंसिंग एवं वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के विद्यार्थी शामिल हुए।

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