अल्मोड़ा-उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेश सं बी -1/1704/ दस -1999 दिनांक 21अप्रैल1999 द्वारा बिंदु सं 3 में दी गई व्यवस्था के अनुसार ही मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों को आहरण वितरण अधिकार दिए जाने चाहिए।उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड जनपद अल्मोड़ा के अध्यक्ष डा मनोज कुमार जोशी व सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक ने अवगत कराया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समूह ख श्रेणी में 5 वर्ष की सेवा पर आहरण वितरण अधिकार दिए जाने की व्यवस्था दी गई है।उत्तराखंड सरकार द्वारा हाल में जो शासनादेश जारी किया उसमें मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर 5 वर्ष की सेवा पर ही आहरण वितरण अधिकार देने की बात कही गई है जो न्यायोचित नहीं है।सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद को भी राजपत्रित अधिकारी घोषित किया गया है।इसी कारण वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कुल 5 वर्ष की सेवा पूरी होने पर आहरण वितरण अधिकार दिए जाने चाहिए और वर्तमान में जिलाधिकारियों द्वारा जनपद में भी इसी व्यवस्था के तहत आहरण वितरण अधिकार दिए जा रहे हैं लेकिन उत्तराखंड सरकार द्वारा केवल मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर की गई सेवा को ही आधार माना गया है जो कि पूर्व जारी शासनादेश के अनुसार नहीं है।धीरेन्द्र कुमार पाठक सचिव उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन जनपद अल्मोड़ा द्वारा उत्तर प्रदेश में जारी शासनादेश के आलोक में ही आहरण वितरण अधिकार दिए जाने की मांग की गई है ताकि अधिक से अधिक संख्या में मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों को आहरण वितरण अधिकार मिल सके।उत्तराखंड में उत्तर प्रदेश में जारी शासनादेश को ध्यान में नहीं रखा जाना दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है जब तक उत्तराखंड सरकार द्वारा उन्हें अतिक्रमित नहीं किया जाता तब तक उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेश को कोई भी शासनादेश चुनौती नहीं दे सकता है।उम्मीद है कि उत्तराखंड सरकार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में जारी शासनादेश के आलोक में ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद पर की गई सेवा को आहरण वितरण अधिकार हेतु जोड़ने के आदेश देंगे।वर्तमान में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद पर की गई सेवा को संज्ञान में नहीं लेने से मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों में रोष व्याप्त है।उत्तराखंड शासन द्वारा जारी शासनादेश सं कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग -2
संख्या 181834/xxx,(2)/2023-E64958देहरादून दिनांक 12जनवरी2024 के बिन्दु सं 5 में संशोधन किया जाय।भविष्य में भी पूर्व में जारी शासनादेशों को भी आलोक में लिया जाय ताकि अनावश्यक रूप से विरोधाभासी स्थिति उत्पन्न न हो।

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