नैनीताल-उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन के प्रदेश महामंत्री पंचम सिंह बिष्ट व प्रदेश उपाध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार पाठक ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि एक्ट में बहुत से संशोधन आवश्यक है।अनुरोध और अनिवार्य स्थानांतरण में भी काउंसलिंग व्यवस्था आवश्यक है।अन्यथा स्थानांतरण कमेटी की मनमानी चलती रहेगी।जब तक सभी जिलों में सुगम व दुर्गम साठ व चालीस का अनुपात नहीं होगा सदस्यों पर एक्ट भारी रहेगा।सरकार को विभिन्न संगठनों को वार्ता के लिए बुलाकर एक्ट की खामी दूर करनी चाहिए।जब से एक्ट बना है तभी से संशोधन की मांग की जा रही है लेकिन सरकार द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।मैदानी जनपदों में दुर्गम क्षेत्रों के निर्धारण के मानकों में बदलाव जरूरी है अन्यथा एक्ट सौ फीसदी लागू नहीं होने के कारण सुगम स्थान खाली हो गए हैं और पदोन्नति में दुर्गम क्षेत्रों में ही पद पूर्ति ज्यादा हो रही है जिससे सरकारी कार्य के निस्तारण में परेशानी हो रही है। जनपद अल्मोडा के अध्यक्ष डा मनोज कुमार जोशी,वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र गुसाई व संगठन मंत्री पुष्कर सिंह भैसोड़ा द्वारा भी एक्ट की खामियों की समीक्षा कर इन्हें दूर करने की मांग की गई है और संगठन के पदाधिकारियों को एक्ट के अनुसार ही पदोन्नति पर जनपद में स्थान दिये जाने की मांग की गई है।जिससे संगठन की गतिविधियों पर कोई असर न हो।वर्तमान में एक्ट में शहीद के परिवार वालों के लिए पदोन्नति में वरीयता नही दी गई है।उन्हें भी काउंसलिंग में वरीयता प्रदान की जायें।धीरेन्द्र कुमार पाठक प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि विकल्प के आधार पर भी स्थानांतरण में मनमानी की जा रही है इसमें अनिवार्य रूप से काउंसलिंग की जाय।मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को गृह जनपद आबंटन शासन स्तर से कार्य व उत्तरदायित्व का प्रख्यापन व आहरण वितरण अधिकार प्रदान करने के लिए भी शीघ्र कार्रवाई की आवश्यकता है।पंचम सिंह बिष्ट प्रदेश महामंत्री द्वारा कहा गया है कि इस राज्य निर्माण के लिए राज्य कार्मिकों द्वारा भी संघर्ष किया गया है लेकिन आज सरकारों द्वारा उनके जायज मांगों का भी निस्तारित नहीं किया जा रहा है।गोल्डन कार्ड विसंगति व पुरानी पेंशन व्यवस्था व संशोधन ए सी पी लागू करने व बिना जांच के किसी भी कार्मिक को निलंबित नहीं करने की भी उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड द्वारा मांग की गई है।पुष्कर सिंह भैसोड़ा व मनोज कुमार जोशी अध्यक्ष द्वारा कहा गया है कि कर्मचारियों व शिक्षकों के सभी अनिस्तारित मामलों की समीक्षा कर शासनादेश जारी करने चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *