अल्मोड़ा-प्रेस को जारी एक बयान में पार्षद वैभव पांडे ने कहा कि अल्मोड़ा नगर क्षेत्र में हाल ही में एक विदेशी महिला द्वारा टॉयलेट की सुविधा न मिलने को लेकर बनाया गया वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है।कुछ लोगों द्वारा इसे नगर की छवि से जोड़कर देखा जा रहा है,जबकि वास्तविकता यह है कि इस घटना ने हमारी मूलभूत सुविधाओं की कमी को उजागर किया है।सबसे पहले यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि जिस व्यक्ति ने वीडियो बनाया, उसने तत्काल उस महिला की सहायता भी की।यह एक मानवीय पहल थी न कि किसी प्रकार की राजनीति।यह कहना कि किसी भी व्यक्ति को होटल या रेस्टोरेंट में टॉयलेट मिल सकता था,व्यावहारिक नहीं है। हमारे यहां गांवों से आने वाले लोग,महिलाएं,बूजुर्ग एवं सामान्य नागरिक अक्सर संकोच के कारण ऐसी जगहों पर जाने से हिचकते हैं। विशेष रूप से डायबिटीज एवं अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए सार्वजनिक शौचालय की उपलब्धता एक आवश्यकता ही नहीं,बल्कि अनिवार्यता है।ऐसे लोगों को बार-बार टॉयलेट की जरूरत होती है और सुविधा का अभाव उनके लिए गंभीर समस्या बन जाता है।यह भी ध्यान देने योग्य है कि यदि कोई आम नागरिक सिस्टम की कमियों को सामने लाता है तो उसे विपक्ष से जोड़कर देखना उचित नहीं है।जनमानस को अपनी समस्याएं रखने का पूरा अधिकार है।हर मुद्दे को राजनीति से जोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है।साथ ही सत्ता में बैठे लोगों द्वारा यह कहना कि पहले क्या हुआ या पहले वालों ने क्यों नहीं किया,समाधान नहीं है।जब पूर्व में कार्य नहीं हो पाए तभी जनता ने वर्तमान प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि अब अपेक्षा है कि समस्याओं का समाधान किया जाए न कि पुराने बहानों को दोहराया जाए।इसके साथ ही नगर में सार्वजनिक शौचालयों के स्पष्ट साइन बोर्ड (दिशा सूचक बोर्ड) भी लगाए जाने आवश्यक हैं ताकि बाहर से आने वाले लोगों एवं पर्यटकों को आसानी से उनकी जानकारी मिल सके और उन्हें भटकना न पड़े।अतः यह समय आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई का है।अल्मोड़ा नगर में पर्याप्त,स्वच्छ एवं सुलभ सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था एवं उचित संकेतक (साइन बोर्ड) प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी नागरिक या आगंतुक को ऐसी असुविधा का सामना न करना पड़े।
