नैनीताल-महानिदेशक स्तर पर माह जून के वेतन पर रोक लगाने से कार्मिकों के लिए आर्थिक समस्या उत्पन्न हो गई है।विभाग द्वारा आनन फानन में लिए गए फैसले से एजुकेशनल मिनिस्ट्रीयल आफीसर्स एसोसिएशन कुमाऊं मण्डल नैनीताल के सभी जनपदों में रोष व्याप्त है।बच्चों की फीस ,मकान किराया व अन्य ऋण जमा करने की भी समस्या उत्पन्न हो गई है।मिनिस्ट्रीयल कार्मिकों द्वारा दिन रात विभाग की सेवा में तत्पर हैं उसके बाद भी कार्मिकों का वेतन रोका जाना दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। संगठन का स्पष्ट रूप से मानना है कि विभाग को नीतियां बनाते समय गंभीरता दिखानी चाहिए।जिससे यह स्थिति उत्पन्न न हो।अब जबकि लगभग सभी विद्यालयों में पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति हो रही है ऐसे में मिनिस्टीरियल कार्मिकों का ही वेतन रोकने का कोई औचित्य नहीं है।मंडलीय अध्यक्ष जगमोहन सिंह खाती, मंडल सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक द्वारा अवगत कराया गया कि कार्मिकों द्वारा कार्य करने के बाद भी वेतन रोका जाना अलोकतांत्रिक है।पाठ्य पुस्तकें वितरण कार्यक्रम में ब्लाकों में कर्मचारियों की कोई भूमिका नहीं होने के बाद भी वेतन रोका जाना दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है और जहां दायित्व दिया गया है वहां लगातार दिन और रात मिनिस्ट्री यल कार्मिकों द्वारा कार्य किया जा रहा है।जिलाध्यक्ष नैनीताल हरिशंकर नेगी,जिलाध्यक्ष अल्मोड़ा पुष्कर सिंह भैसोड़ा,जिला मंत्री अल्मोड़ा पंकज जोशी व अन्य पदाधिकारियों द्वारा सभी कार्मिकों के वेतन बहाली आदेश निर्गत करने की मांग की गई है।जो किताबें विभाग द्वारा वितरित करने के लिए दी जा रही है वह वितरित हो रही है ऐसे में वेतन रोकने का कोई औचित्य नहीं है।वेतन बहाली आदेश निर्गत नहीं होने पर आंदोलनात्मक कार्यवाही के लिए सम्पूर्ण उत्तरदायित्व विभाग का होगा। कार्य करने के बाद भी वेतन आहरण रोकने जैसे कार्य अलोकतांत्रिक है और मानवाधिकार का भी उल्लंघन है।
