अल्मोड़ा-ग्राम बीना,हड़ोली, भैसोड़ी,पाटिया,कोटयुडा, पिल्खा,बिरोड़ा,टाटिक,सिराड़,कटारमल,तिलोरा,सकनियाकोट, रैत,चनोली एवं बड़गांव में हंस फाउंडेशन द्वारा संचालित वन अग्नि शमन एवं रोकथाम परियोजना के अंतर्गत जन-जागरूकता हेतु नुक्कड़ नाटक कार्यक्रम का आयोजन ग्राम प्रधान/वन सरपंच की अध्यक्षता में किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को जंगलों में लगने वाली आग के कारणों,उससे होने वाले नुकसान तथा रोकथाम के उपायों के प्रति जागरूक करना था।इस अवसर पर पराज सांस्कृतिक समिति की टीम ने नया सवेरा नाटक के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण,जंगलों की महत्ता तथा वनाग्नि के दुष्प्रभावों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।नाटक के जरिए बताया गया कि जंगल जल स्रोतों,पशुओं के चारे और पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद जरूरी हैं और उनकी सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को वनाग्नि के कारणों,बचाव के उपायों,समय पर सूचना देने के महत्व तथा फायर वॉचर और फायर फाइटर की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई।साथ ही महिला समूहों,युवाओं और ग्रामीणों से जंगलों की सुरक्षा में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई।नुक्कड़ नाटक कार्यक्रम में सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रतिभाग किया और कार्यक्रम के अंत में सभी ने वनों को आग से बचाने एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प लिया।इस अवसर पर ग्राम प्रधान दीपा नारायण,सुनील बाराकोटी एवं नीमा आर्या,पराज सांस्कृतिक समिति के वरिष्ठ लोक कलाकार हर्षपाती रायल,प्रेम बल्लभ पंत, जितेंदर कुमार,पवन कुमार, प्राची एवं काव्यांजलि,वन विभाग के वन दरोगा पंकज गजारिया,बीट अधिकारी कुणाल एवं सुभाष तथा हंस फाउंडेशन की टीम के साथ-साथ फायर फाइटर, महिला समूह,युवा,अन्य ग्रामीण समेत सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।




