अल्मोड़ा-आध्यात्मिक लेखक एवं विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-वीपीकेएएस), अल्मोड़ा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रमेश सिंह पाल ने पतंजलि योगपीठ में योग गुरु बाबा रामदेव से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान योग, अध्यात्म और उत्तराखंड में रुद्राक्ष की खेती को वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक रूप से बढ़ावा देने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने में रुद्राक्ष की खेती की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया गया। डॉ. पाल उत्तराखंड में रुद्राक्ष की खेती को आजीविका और कृषि आधारित उद्यम के रूप में विकसित करने के प्रयासों में जुटे हैं। इसी क्रम में उन्होंने अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ नेपाल का दौरा कर रुद्राक्ष की खेती, उत्पादन, प्रबंधन और विपणन का अध्ययन किया था। टीम में टिहरी के विधायक किशोर उपाध्याय और रुद्राक्ष विशेषज्ञ प्रिंस अग्रवाल शामिल थे। नेपाल भ्रमण के आधार पर तैयार विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री के माध्यम से राज्य शासन को प्रस्तुत की गई है। मुख्यमंत्री ने उद्यान विभाग को प्रदेश में रुद्राक्ष की खेती को बढ़ावा देने के लिए नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। भेंट के दौरान प्रिंस अग्रवाल ने पतंजलि योगपीठ से उत्तराखंड में रुद्राक्ष की खेती को प्रोत्साहित करने में सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पतंजलि का तकनीकी अनुभव और संस्थागत सहयोग इस पहल को संगठित रूप देने के साथ पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। इस अवसर पर डॉ. रमेश सिंह पाल और प्रिंस अग्रवाल ने बाबा रामदेव को रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया। बाबा रामदेव ने रुद्राक्ष की खेती को लेकर किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और चर्चा के लिए आभार व्यक्त किया। डॉ. पाल ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान, स्थानीय संसाधनों और संस्थागत सहयोग के माध्यम से रुद्राक्ष की खेती को बढ़ावा देकर उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि विविधीकरण, ग्रामीण स्वरोजगार और पलायन रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रदेश की कृषि, पर्यावरण संरक्षण और सतत आजीविका को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *