कपकोट-उत्तराखंड जैसे छोटे और पहाड़ी राज्य में फिलहाल कोई भी सख्त भू कानून लागू नहीं है,इसका सीधा मतलब है कि यहां आकर कोई भी कितनी भी जमीन अपने नाम से खरीद सकता है,पहाड़ी राज्यों में सस्ते दामों पर जमीन खरीदकर उसे बाहरी लोग अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बाहरी हस्तक्षेप से यहां की संस्कृति को बड़ा खतरा है।इस सब को मद्देनजर रखते हुए कपकोट के युवाओं ने कपकोट तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया।ज्ञापन प्रेषित करने वाले गंगा सिंह बसेड़ा का कहना है कि उत्तराखंड का जब गठन हुआ था तो यहां भू कानून भी लागू था हालांकि ये इतना सख्त नहीं था।राज्य बनने के बाद पहले दो साल तक बाहरी लोग यहां 500 वर्ग मीटर तक जमीन खरीद सकते थे।लेकिन जब 2007 में भुवन चंद्र खंडूरी सीएम बने तो उन्होंने इसे घटाकर 250 वर्गमीटर कर दिया।लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेद्र सिंह रावत ने अध्यादेश लाकर इस कानून को लगभग पूरी तरह से खत्म करने का काम किया।यानी उत्तराखंड में जमीन खरीदने की सीमा को ही खत्म कर दिया गया।हम लोग चाहते हैं कि हमें भी हिमाचल जैसा भू कानून चाहिए। हिमाचल प्रदेश में एक सख्त भू कानून है।यहां गैर हिमाचली जमीन नहीं खरीद सकता है।यानी बाहरी लोगों की घुसपैठ पर पूरी तरह से रोक है।भू कानून से हमारी भाषा संस्कृति और सभ्यता की सुरक्षा होगी।हमारी देवभूमि में भूमिया देवता का महत्व आज का नहीं बल्कि प्राचीन काल का है भूमिया देवता ने ही आज तक हमारी भूमि हमारे परिवार गांव हमारी कला और संस्कृति को संरक्षित रखा है।आज उन्हें भूमिया देवताओं का आह्वान कर हमें उत्तराखंड और उत्तराखंडीयत को बचाने के लिए भू कानून की सख्त आवश्यकता है।हम चाहते हैं कि उत्तराखंड सरकार को इस विषय का संज्ञान लेकर उत्तराखंड की भलाई में एक कठोर भू कानून लागू करने का निर्णय लेकर उत्तराखंडवासियों को खुशियों की सौगात प्रदान करें।इस अवसर पर गंगा सिंह बसेड़ा,गजेंद्र कपकोटी,विनोद कपकोटी,जगदीश सिंह,गणेश कपकोटी,वीरेंद्र कपकोटी आदि उपस्थित रहे।
