अल्मोड़ा-बुरा ना मानो होली है!क्योंकि इस बार रंग सिर्फ गुलाल में नहीं,अल्मोड़ा की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में भी चढ़ गया है।अब तो हाल ऐसा है कि बीमारियां खुद सोच में पड़ गई हैं यहां इलाज इतना बढ़िया हो गया है,चलो कहीं और चलते हैं!सुना है अब अस्पतालों में डॉक्टर समय से पहले आ जाते हैं और मरीज बाद में।पर्ची कटवाने से पहले ही दवा मिल जाती है।जांच मशीनें इतनी तेज़ हैं कि रिपोर्ट आने से पहले ही मरीज ठीक होने लगता है।बुरा ना मानो होली है!पहले लोग कहते थे डॉक्टर कब आएंगे?अब कहते हैं इतने डॉक्टर आ गए,जगह कहां है?कार्डियोलॉजिस्ट,नेफ्रोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन सब लाइन लगाकर सेवा दे रहे हैं।डायलिसिस यूनिट इतनी आधुनिक कि दिल्ली-मुंबई वाले भी अपॉइंटमेंट लेने को तैयार।
अस्पताल की इमारत चमचमा रही है,दवाइयों की कमी अब सिर्फ कहानियों में मिलती है। एम्बुलेंस इतनी फुर्तीली कि मरीज सोचता रह जाए और वो घर के बाहर पहुंच जाए।गांवों की बात करें तो वहां भी स्वास्थ्य सेवाएं ऐसी दुरुस्त कि पहाड़ की चढ़ाई भी हार मान जाए।आशा कार्यकर्ता से लेकर विशेषज्ञ डॉक्टर तक सब एक फोन पर उपलब्ध।और सबसे बड़ी बात अब किसी को रेफर नहीं किया जाता।बीमारी ही रेफर हो जाती है,मरीज नहीं!तो भाइयों-बहनों, इस होली पर अगर कोई कहे कि अल्मोड़ा की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की जरूरत है, तो मुस्कुराइए और कह दीजिए “बुरा ना मानो होली है!”क्योंकि व्यंग्य के रंग में सच्चाई भी छिपी है और उम्मीद का गुलाल अभी सूखा नहीं है।

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