अल्मोड़ा-प्रदेश की भाजपा सरकार पर त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं को समाप्त करने की दिशा में बढ़ रही है। प्रेस को जारी बयान में उन्होंने कहा कि बीते पांच वर्षों में विकासखंड स्तर पर क्षेत्र पंचायत की केवल एक बैठक आयोजित की गई, जबकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नियमित बैठकों का आयोजन जरूरी होता है। कुंजवाल ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने ग्राम सभा, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत को संविधान के अनुरूप वैधानिक अधिकार दिए थे, जिससे ये संस्थाएं ग्राम्य क्षेत्रों में जनहित के कार्यों को मजबूती से अंजाम देकर लोकतंत्र को मजबूत कर सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार न तो समय पर चुनाव करा पा रही है और न ही निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों के साथ कार्य करने दे रही है। उन्होंने कहा कि जो पंचायतें निर्वाचित हुई भी हैं, उन्हें प्रशासकीय ढंग से संचालित किया जा रहा है। जिला प्रशासन के माध्यम से इन संस्थाओं को सिर्फ कागजों पर सीमित कर दिया गया है। विकासखंड स्तर पर क्षेत्र पंचायत की पहली बैठक के बाद पांच वर्षों तक न कोई बैठक बुलाई गई, न ही पंचायती योजनाओं पर चर्चा हुई और न ही स्वीकृत धन का उचित वितरण सुनिश्चित किया गया। कुंजवाल ने कहा कि क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ब्लॉक प्रमुखों को केवल नाम मात्र का प्रतिनिधि बना दिया गया है। सरकार और प्रशासन की मिलीभगत से उनके अधिकारों को छीन लिया गया है, जो संविधान और लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह संवैधानिक संस्थाओं को नजरअंदाज किया गया, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा साबित होगा।

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