अल्मोड़ा-एन एम ओ पी एस उत्तराखंड के प्रांतीय कोर कमेटी सदस्य धीरेन्द्र कुमार पाठक ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करनी चाहिए।उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों व कार्मिकों को सरकार द्वारा पुरानी पेंशन का लाभ नहीं दिया जा रहा है और एन पी एस लागू कर दिया और उसके बाद यू पी एस का प्राविधान भी किया गया किन्तु यह योजना पुरानी पेंशन से कोशों दूर है।पुरानी पेंशन व्यवस्था के तहत सरकारी कार्मिक व शिक्षकों को अंतिम वेतन से आधा पेंशन व मंहगाई भत्ता दिया जाता है और ग्रेच्युटी, राशि करण का लाभ भी मिलता है।जबकि एन पी एस में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।एन पी एस के तहत कार्मिकों का अभिदान व सरकारी अभिदान सेवा निवृत्त होने के बाद 60 फीसदी नगद व शेष 40 प्रतिशत की धनराशि को वार्षिक पेंशन के लिए रख दिया जाता है और उसी 40 फीसदी पर प्राप्त ब्याज को पेंशन के रूप में दिया जाता है जो कि सामान्य धनराशि होती है।जी पी एफ इत्यादि का लाभ भी नहीं है जो कि सामान्य जीवन निर्वाह के लिए जरूरी है शिक्षा ऋण कार ऋण व मकान ऋण अग्रिम भी व्यक्ति जी पी एफ से ले सकता है यह एन पी एस में नहीं है।सरकार ने कार्मिकों के दबाव के बाद 25 वर्ष की सेवा के बाद यू पी एस के अन्तर्गत सेवानिवृत्त से ठीक पहले अंतिम 12 मासिक औसत मूल वेतन के 50प्रतिशत की दर से भुगतान की बात कही है।कम अर्ह सेवा अवधि के मामले में आनुपातिक भुगतान की बात कही जा रही है और न्यूनतम भुगतान दस हजार प्रतिमाह 10 वर्ष की सेवा पर कहा जा रहा है जो कि सरासर अन्याय है।जबकि पुरानी पेंशन में 20 वर्ष की सेवा के बाद ही पचास फीसदी अंतिम वेतन की धनराशि मिलती है और ग्रेच्युटी राशि करण अलग से।पुरानी पेंशन में कार्मिक के सेवानिवृत्त होने के बाद पेंशन व सेवानिवृत्त कार्मिक के मृत्यु पर पारिवारिक पेंशन व पारिवारिक पेंशनर की मृत्यु के बाद अविवाहित पुत्री व विधवा पुत्री को भी आय के साधन नहीं होने पर पारिवारिक पेंशन मिलती है।एन पी एस,राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत किसी कार्मिक की मृत्यु होने पर उसके नामांकित व्यक्ति को पूरा पेंशन फंड मिल सकता है या वे पेंशन के लिए एन्युटी वार्षिकी खरीदने का विकल्प चुन सकता है यदि कार्मिक पहले से पेंशन के लिए अपना विकल्प चुन चुका है तो वहीं विकल्प अंतिम माना जाता है और परिवार को कोई संशोधन का अधिकार नहीं होगा।नामिनी के विकल्प के तहत एन्युटी खरीदने का विकल्प चुन सकता है और पेंशन भोगी की तरह मासिक पेंशन प्राप्त कर सकता है इसके लिए उन्हें एन्युटी सर्विस प्रोवाइडर ए एस पी और डेथ विदड्रॉल फार्म में एन्युटी स्कीम चुननी होगी।यहां एन्युटी का मतलब एक बीमा उत्पाद है जिसमें एकमुश्त धनराशि का निवेश होता है और बदले में भविष्य में नियमित अंतराल पर जैसे मासिक तिमाही या वार्षिक में एक निश्चित आय मिलती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से सेवानिवृत्त योजना के रूप में किया जाता है ताकि नियमित कमाई बंद होने के बाद भी जीवनभर या एक निश्चित अवधि के लिए नियमित आय प्राप्त हो सकें।धीरेन्द्र कुमार पाठक प्रदेश कोर कमेटी सदस्य ने कहा कि कुल मिलाकर एन पी एस व यू पी एस नेशनल पेंशन स्कीम व यूनाइटेड पेंशन स्कीम दोनों कार्मिकों के लिए पेंशन के नाम पर धोखे के अलावा कुछ भी नहीं है।सरकार को कार्मिकों को शिक्षकों को पुरानी पेंशन का लाभ अक्टूबर 2005 के बाद भी प्रदान करना चाहिए।कार्मिक, शिक्षक,अधिकारी पूरी सेवा करने के बाद भी पेंशन का लाभ प्राप्त नहीं करते हैं तो यह लोकतंत्र के लिए भी शर्मनाक स्थिति है।मुख्यमंत्री,प्रधानमंत्री,विधायक व सांसद तो आज भी यानि अक्टूबर 2005 के बाद भी पुरानी पेंशन का लाभ प्राप्त कर सकते हैं लेकिन शिक्षकों कार्मिकों को पुरानी पेंशन नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में है। पुरानी पेंशन व्यवस्था से बाजार व्यवस्था भी बनी रहती है और इससे बाजार व्यवस्था भी बढ़ती है क्योंकि पेंशनर्स व पारिवारिक पेंशनर प्राप्त धनराशि को सामग्री क्रय में बाजार में ही लगाते है और महीने के अंत तक सब धनराशि लगभग खर्च हो जाती है जो कि अर्थव्यवस्था को भी चालू रखती है लेकिन सरकार द्वारा इसे घाटे के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। धीरेन्द्र कुमार पाठक ने स्पष्ट कहा कि सरकार स्पष्ट करें कि वर्ष 2005 से पहले सभी सरकार पेंशन दे रही थी किसी भी सरकार ने वर्ष 1947 से 2005 तक किसी गजट में इसका उल्लेख नहीं किया और कोई गजट भी प्रकाशित नहीं हुआ। इस प्रकार स्पष्ट है कि सरकार अपने दायित्वों से बचने की कोशिश कर रही है और एक देश में दो विधान की बात कर रही है जो कि लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार अपने दायित्वों से बच रही है।आज की स्थिति में टैक्स भी कई है जी एस टी के रूप में भी लाखों करोड़ों का टैक्स वसूला जा रहा है और कार्मिक शिक्षक से भी वेतन से अरबों रुपए टेक्स की वसूली होती है लेकिन सरकार पेंशन के रूप में धनराशि से बच रही है यह शर्मनाक स्थिति है।वर्तमान में एन एम ओ पी एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय बन्धु व राष्ट्रीय सचिव स्थित प्रज्ञा व प्रदेश में जीतमणि पैन्युलीव सचिव मुकेश रतूड़ी के नेतृत्व में पुरानी पेंशन के लिए आंदोलन चलाया जा रहा है जिसके लिए सभी कार्मिक शिक्षक पुरानी पेंशन के लिए संघर्षरत है और रहेंगे।दिनांक 25 नवंबर की दिल्ली रैली प्रस्तावित की गई है जिसमें प्रतिभाग के लिए सभी से आह्वान किया गया है।सभी सहयोगी संगठनों के पदाधिकारियों व सदस्यों से अनुरोध है कि पुरानी पेंशन के लिए संघर्षरत रहना होगा तभी पुरानी पेंशन मिल सकती है। धीरेन्द्र कुमार पाठक प्रदेश कोर कमेटी सदस्य ने कहा कि सरकार द्वारा हमसे पुरानी पेंशन 2005 में छीनी गई है उसे सरकार से वापस लेना है इसके लिए सभी को कृतसंकल्प लेना भी होगा दो विधान किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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