अल्मोड़ा-उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड जनपद अल्मोड़ा के सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि सरकार व शिक्षा विभाग ने मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों सहित अन्य कार्मिकों को अपनी नीतियों व लेट लतीफी के कारण बैकफुट पर धकेल दिया है। वर्तमान में सुगम से सुगम स्थानांतरण की अनुमति सरकार द्वारा 2018 के एक्ट में संशोधन करते हुए माह जनवरी में प्रदान की गई मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों सहित अन्य कार्मिकों द्वारा पारस्परिक स्थानांतरण के आवेदन पत्र ससमय निदेशालय में जमा करा दिए गए लेकिन विभाग द्वारा अद्यतन तक निर्णय नहीं लिया गया और अब आचार संहिता की तैयारी है। विभाग द्वारा यह भी नहीं सोचा गया कि वर्ष 2018 से शासनादेश जारी होने के बाद इन मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों को गृह जनपद से बाहर भेजा गया था। काउंसलिंग के माध्यम से। उस समय भी विभाग द्वारा जल्दीबाजी में निर्णय लिया गया जबकि उत्तराखंड शासन के आधे विभागों द्वारा अपने कार्मिकों को उनके गृह जनपद में ही पदोन्नति दी गई। जब इस संबंध में शासन स्तर पर सूचना अधिकार व अन्य तरीकों से जानकारी ली गई तो पता चला कि यह नियम सभी विभागों पर लागू नहीं था फिर सरकार एक वर्ष पूर्व सुगम से दुर्गम व दुर्गम से सुगम व दुर्गम से दुर्गम पारस्परिक स्थानांतरण खोल दिए गए लेकिन सुगम से सुगम पर रोक लगा दी गई। जनवरी 24 में सुगम से सुगम पारस्परिक स्थानांतरण की अनुमति प्रदान की गई लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा एक महीने से आवेदन विभाग में जमा होने के बाद भी उन पर निर्णय नहीं लिया और मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों सहित अन्य कार्मिकों की आशाओं पर पानी फेर दिया गया। निदेशालय के इस निर्णय से मिनिस्टीरियल कार्मिकों में भारी रोष व्याप्त है। उत्तराखंड राज्य बनने पर अधिकारियों में निर्णय लेने की क्षमता पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है। एक बार फिर निदेशालय द्वारा मिनिस्टीरियल कार्मिकों को ग़लत निर्णय के कारण बैफ फुट पर धकेल दिया है। दूसरी विसंगति मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों को राजपत्रित अधिकारी के रूप में पांच वर्ष की सेवा पर सीधे आहरण वितरण अधिकार नहीं दिये गये है इसके लिए भी जिलाधिकारी का अनुमोदन जरूरी बनाया गया है। सरकार शासन व विभाग की कुटिल नीतियों के कारण कार्मिक को सदा हाथ जोड़ने के लिए बाध्य किया जा रहा है जो संभव नहीं है। राजपत्रित अधिकारी के सम्मान से भी खेला हो रहा है। लोक सूचना अधिकारी के पदों का सृजन अक्टूबर 2005 से नहीं किया गया है और अब मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों को ही लोक सूचना अधिकारी की सीधे जिम्मेदारी दी गई है और आहरण वितरण अधिकारी के लिए जटिल नियमों को लागू किया जा रहा है। मिनिस्टीरियल कार्मिकों के साथ भेदभाव पूर्ण नीतियों का सरकार शासन व विभाग को परित्याग करना होगा अन्यथा यह विस्फोटक स्थिति उत्पन्न होने पर सरकार,विभाग व शासन की जिम्मेदारी होगी। एजुकेशनल मिनिस्ट्रीयल आफीसर्स एसोसिएशन कुमाऊं मण्डल के अध्यक्ष पुष्कर सिंह भैसोड़ा पूर्व अध्यक्ष जगमोहन सिंह खाती व एजुकेशनल मिनिस्ट्रीयल आफीसर्स एसोसिएशन कुमाऊं मण्डल के पूर्व सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक द्वारा विभाग की लेट लतीफी की नीति व निर्णय लेने की क्षमता का अभाव पर रोष व्यक्त किया है और वर्तमान नीतियों की निंदा की है। धीरेन्द्र कुमार पाठक पूर्व सचिव ने कहा कि निदेशालय में बिना धरना प्रदर्शन के कार्य का निस्तारण नहीं होना लोकतांत्रिक मूल्यों पर कलंक लगने के समान है।धीरेन्द्र कुमार पाठक ने अवगत कराया कि पूर्व में भी शिक्षा निदेशालय में विभाग द्वारा मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों की डीपीसी करने के बाद पदोन्नति सूची रोक दी गई थी उसके बाद पदाधिकारियों द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया जिससे बाद मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर सूची जारी हुई। विभाग ने पदोन्नति सूची तो जारी कर दी और पूर्व पदाधिकारी मंडल अध्यक्ष जगमोहन सिंह खाती सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक तत्कालीन जिलाध्यक्ष पुष्कर सिंह भैसोड़ा अध्यक्ष पिथौरागढ सौरभ चंद वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय पंत आदि का वेतन अवरूद्ध कर दिया गया और दो माह बाद बहाल किया गया।श्री पाठक ने कहा कि पदोन्नति में काउंसलिंग के लिए भी पूर्व में कुमाऊं मण्डल के पदाधिकारियों द्वारा जनपदों के सहयोग से ऊधमसिह नगर में आमरण अनशन किया गया जो कि सात दिन तक चला इसके बाद पदोन्नति में काउंसलिंग की व्यवस्था लागू हुई जिसका लाभ वर्तमान में भी सभी को मिल रहा है। कुल मिलाकर जब तक धरना प्रदर्शन नहीं करेंगे विभाग सुनवाई नहीं करता । 2018 से गृह जनपद की आशा लगाए मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों की भावनाओं पर विभाग द्वारा तुषारापात किया है जिसकी जितनी भी निंदा की जाय कम है। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्री टेचन कुमार प्रजापति जे डी आर्य श्रीमती सुशीला रावत, षष्टी सिंह रावल द्वारा भी विभाग की नीति पर सवाल खड़े किए हैं। शासन से लगातार स्थानांतरण व विभाग से भी दूसरे संवर्ग की पदोन्नति सूची जारी हुई लेकिन मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों की सूची पर अघोषित रोक लगा दी गई। उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड जनपद अल्मोड़ा के अध्यक्ष डा मनोज कुमार जोशी ने कहा शिक्षा निदेशालय द्वारा पारस्परिक स्थानांतरण की सूची जारी न करना नादिरशाही का प्रतीक है इसका विरोध किया जाता है।
