अल्मोड़ा-सरकार द्वारा धरना प्रदर्शन कार्यक्रम पर रोक लगाने का शिक्षा समन्वय समिति जनपद अल्मोड़ा द्वारा विरोध किया गया है।समिति के पदाधिकारियों द्वारा कहा गया है कि यह फैसला अलोकतांत्रिक है और इससे शिक्षकों व कार्मिकों का दमन होगा तथा उनके कार्यो का निस्तारण नहीं हो सकेगा।इससे उन अधिकारियों को बल मिलेगा जो कि जानबूझकर काम को नहीं करते हैं।तीन महीने के लिए राज्य चुनावी मोड में चला जायेगा और समस्याओं का निराकरण नहीं होगा यह चिन्ता जनक स्थिति है । राज्य सरकार को इस आदेश को वापस लेना चाहिए और सभी समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए जाने चाहिए।शिक्षा समन्वय समिति के अध्यक्ष डाॅ मनोज जोशी,वरिष्ठ उपाध्यक्ष पुष्कर सिंह भैसोड़ा, उपाध्यक्ष दिगम्बर फुलोरिया,जगदीश भंडारी,भूपाल चिलवाल,हेम कबडवाल,सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक,संजय बिष्ट,संगठन मंत्री बलवीर सिंह भाकुनी,कोषाध्यक्ष अनिल कुमार कांडपाल,संयुक्त मंत्री दीपक बगड़वाल,प्रचार मंत्री पूरन सिंह अल्मियां,सांस्कृतिक मंत्री बी० डी० पांडेय,संप्रेक्षक द्वारा धरना प्रदर्शन कार्यक्रम पर रोक लगाने से संबंधित आदेश को वापस लेने की मांग की है। सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक द्वारा कहा गया है कि धरना प्रदर्शन कार्यक्रम पर रोक से लंबित मामलों के निपटारे में देरी होती है और विभागों पर दबाव नहीं बनता है।इसलिए लोकतंत्र में धरना प्रदर्शन की इजाजत है। संवैधानिक अधिकार को रोकने ठीक नहीं है।अध्यक्ष डाॅ० मनोज जोशी द्वारा भी इस आदेश को अलोकतांत्रिक बताया है।पुष्कर सिंह भैसोड़ा जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष द्वारा कहा गया कि सरकार द्वारा सभी लंबित मामलों के निपटारे के लिए आदेश निर्गत करने चाहिए।धरना प्रदर्शन करने वाले सचिवालय कर्मियों के सचिवालय जाने पर भी रोक लगाई गई है।ऐसे फैसले अलोकतांत्रिक व नादिरशाही है।उन्होंने कहा कि सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी को वार्ता के लिए आमंत्रित किया जाय तथा सभी फैसलों की समीक्षा की जाय।सरकार द्वारा पुरानी पेंशन बहाली व चिकित्सा प्रतिपूर्ति पर भी सही निर्णय नहीं लिया गया है।लोकतंत्र में अलोकतांत्रिक फैसलों का कोई स्थान नहीं है।सरकार के किसी भी अप्रिय फैसले का विरोध किया जायेगा तथा शिक्षा समन्वय समिति सचिवालय संघ के साथ खड़ी रहेगी।