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अल्मोड़ा-अध्यक्ष उत्तरांचल फैडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन कुमाऊं मण्डल नैनीताल,
प्रदेश उपाध्यक्ष उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड धीरेन्द्र कुमार पाठक ने उत्तराखंड के सभी संवर्गों के शीर्ष पदाधिकारियों व शीर्ष नेतृत्व से अनुरोध किया है कि वर्तमान में सरकार द्वारा कोविड के नाम पर कार्मिकों के धरना प्रदर्शन कार्यक्रम व हड़ताल व अनशन आदि पर रोक लगाई गई है।जिससे सभी विभागों के पदोन्नति पर भी असर पड़ रहा है और भर्ती वर्ष के 20 दिन बचे हुए हैं सभी जगहों से पदोन्नति नहीं होने की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही है और सरकार व शासन को भेजें जाने वाले पत्रों को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि हैरतअंगेज तथ्य यह है कि सरकार व विपक्षी दलों द्वारा आम चुनाव की तैयारी की जा रही है और हर जगह इस पर रायशुमारी हो रही है।जहां राजनैतिक दलों द्वारा सत्ता के लिए सात आठ महीने पूर्व से ही बिगुल फूंका जा रहा है और कार्मिकों को उनके सेवा के प्रतिफल पदोन्नति से भी कोरोना के नाम पर बाधित किया जा रहा है।वर्ष 1994 में इस राज्य के निर्माण के लिए 90 दिन से अधिक संघर्षरत रहने वाले अपनी सदस्यों के पदोन्नति के लिए भी एकजुटता दिखा दें तो अभी भी बाजी पलट सकती है। उन्होंने सभी से अपील की कि सभी को एकजुट होकर मुख्यमंत्री से मिलकर बात रखनी चाहिए और पदोन्नति न होने की स्थिति में आंदोलन का नोटिस जारी करना चाहिए जब सभी उत्तराखंड के कार्मिक द्वारा आंदोलन किया जायेगा तो सरकार किस किस पर कार्यवाही करेगी।कार्मिकों के हितों के लिए सभी संगठनों के शीर्ष पदाधिकारियों को भर्ती वर्ष बर्बाद न हो सोचना ही होगा अन्यथा फिर कुछ हाथ आने वाला नहीं है सिवाय आरोप प्रत्यारोप के।कार्य क्षेत्र भले ही किसी का हो लेकिन यह स्वीकार करना भी सीखना होगा कि सरकार के दोहरे रवैए से पदोन्नति बाधित हो रही है।अधिकारियों द्वारा कोरोना काल का बहाना बनाया जा रहा है और पदोन्नति संशोधन व पदोन्नति प्रक्रिया को रोका गया है।उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के अधिकारियों को बिना धरना प्रदर्शन के बात समझ में नहीं आती है।पूरे प्रदेश में लगभग सभी विभागों में 2000-3000 हजार पदोन्नति अनुमानित है संख्या घट बढ़ सकती हैं।ऐसी स्थिति में सभी पदाधिकारियों की शीर्ष स्तर पर चुप्पी आश्चर्यजनक है।उन्होंने कहा कि गला घोंटने व कटने की स्थिति में भी सभी चुप है यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।संगठन के उच्च मापदंडों को देखते हुए आगे बढ़ना चाहिए और जरूरत हो तो सभी पदाधिकारियों को एक बैनर के नीचे आकर संघर्ष का बिगुल फूंकना चाहिए।अन्यथा जिस तरह 11 महीने निकल गये यह भर्ती वर्ष का महत्वपूर्ण महीना भी निकल जायेगा फिर सोचने से कुछ नहीं होगा।उत्तराखंड में लगातार सभी बिंदु पर सरकार का रवैया उपेक्षात्मक रहा है गोल्डन कार्ड, स्थानांतरण सत्र को शून्य घोषित करना,डी ए पर लगातार रोक,पुरानी पेंशन को बहाल नहीं करना, शिथिलीकरण बहाल न करना, संशोधित ए सी पी आदि मामलों में कार्यवाही नहीं करना सरकार के गलत रवैए को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि गलत को गलत कहना सीखना होगा तभी संगठनों का भी महत्व है लोकतंत्र विरोध की इजाजत देता है।केवल 20 दिनों में चार चार स्तरों की पदोन्नति को बाहर निकालने को मिशन के तौर पर लेना होगा।समय की मांग है कि एकजुटता दिखानी होगी सभी शीर्ष संगठनों के पदाधिकारियों से निवेदन है कि निश्चित रूप से आगे आने की आवश्यकता है सदस्यों के हितों पर आंच न आए इसलिए सभी को एकजुट होकर सेवा के प्रतिफल के लिए प्रेरणास्रोत बनना चाहिए।उन्होंने कहा कि जब सरकार व विभाग बहानेबाजी कर रहे हैं और उपेक्षात्मक रवैया चरम पर है तो हम सभी को एकजुट होकर आगे बढ़ने से रोकने वाले कोई नहीं है।गंभीर चिंतन व मंथन की आवश्यकता है सभी एक हो जाये तो सरकार को झुकना ही होगा। सरकार से ऐसे शासनादेश के लिए भी मांग रखने की आवश्यकता है जिसमें समयबद्ध पदोन्नति नहीं होने पर संबंधित पदोन्नत करने वाले अधिकारी को निलंबित कर दिया जाना चाहिए तभी सबक लेंगे अन्यथा अंतहीन सिलसिला कब तक रहेगा यक्ष प्रश्न है। अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत रहना हमारा नैतिक जिम्मेदारी व दायित्व है।उन्होंने कहा कि अब देखना है कि जो चीज हमारे हाथ में उसके लिए कितने हाथ आगे बढ़ते हैं उसी कार्यस्थल पर पदोन्नति में कार्यभार ग्रहण करने से कोई विधिक आपत्ति भी नहीं है सरकार को भी गंभीरता दिखानी चाहिए।उन्होंने कहा कि सरकार ने आंख बंद कर ली है तो संगठनों को अपनी आंखों को खोलना चाहिए 2000-3000 लगभग पदोन्नति बाधित होना मजाक का विषय नहीं है सभी को गंभीरता दिखानी होगी।

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