अल्मोड़ा-राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के निर्देश पर शनिवार को जनपद अल्मोड़ा के समस्त न्यायालयों, बाह्य न्यायालयों और तहसील न्यायालयों में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत के माध्यम से लंबित वादों के त्वरित और आपसी सहमति से निस्तारण के उद्देश्य से जनपद स्तर पर चार तथा बाह्य न्यायालयों के लिए दो, कुल छह बैंचों का गठन किया गया। जिला एवं सत्र न्यायालय अल्मोड़ा में गठित बैंच के समक्ष एनआई एक्ट, मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद, सार्वजनिक उपयोगिता सेवा और अन्य सिविल मामलों सहित कुल दस लंबित वाद रखे गए। इन सभी मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया, जिसमें 38 लाख 12 हजार 714 रुपये की सुलह राशि तय हुई। परिवार न्यायालय अल्मोड़ा की बैंच में वैवाहिक और पारिवारिक विवादों से जुड़े बारह लंबित मामलों को रखा गया। सभी मामलों का आपसी सहमति से समाधान किया गया, जिसमें 4 लाख 57 हजार 900 रुपये की सुलह राशि निर्धारित हुई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा की संयुक्त बैंच के समक्ष आपराधिक कंपाउंडेबल, एनआई एक्ट, कंपाउंडेबल ट्रैफिक चालान और अन्य मामलों सहित कुल 51 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में सुलह समझौते के तहत कुल 27 लाख 55 हजार 231 रुपये की राशि तय हुई। सिविल जज सीनियर डिवीजन अल्मोड़ा की बैंच के समक्ष कंपाउंडेबल ट्रैफिक चालान के दस लंबित वादों के साथ ही बैंकों से संबंधित 217 प्री-लिटिगेशन मामलों को रखा गया। ट्रैफिक चालानों से जुड़े मामलों में 17 हजार 800 रुपये की सुलह राशि रही, जबकि बैंक प्री-लिटिगेशन मामलों में 1 करोड़ 48 लाख 78 हजार 700 रुपये का सुलह समझौता हुआ। सिविल जज जूनियर डिवीजन द्वाराहाट की बैंच में विभिन्न प्रकृति के कुल 12 लंबित वादों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में सुलह समझौते की कुल राशि 10 लाख 95 हजार 500 रुपये रही। इसी तरह रानीखेत क्षेत्र में गठित बैंच के समक्ष एनआई एक्ट और वैवाहिक मामलों से जुड़े 15 वादों का आपसी सहमति से समाधान किया गया, जिसमें 1 करोड़ 6 लाख 81 हजार 734 रुपये की सुलह राशि तय हुई। इस प्रकार राष्ट्रीय लोक अदालत में जनपद अल्मोड़ा में कुल 110 लंबित वादों और 217 बैंक प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण किया गया। लंबित वादों में सुलह समझौते की कुल राशि 1 करोड़ 88 लाख 20 हजार 879 रुपये रही, जबकि प्री-लिटिगेशन मामलों में 1 करोड़ 48 लाख 78 हजार 700 रुपये की सुलह राशि तय हुई।

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