बागेश्वर-क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता गंगा सिंह बसेड़ा ने बागेश्वर जिला चिकित्सालय की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा रोष व्यक्त किया है।प्रेस को जारी बयान में उन्होंने कहा कि लगभग तीन लाख की आबादी वाले बागेश्वर जिले के जिला मुख्यालय का अस्पताल एक रेफरल सेंटर बन चुका है।जिला अस्पताल में दूर-दूर से लोग अपने ईलाज के लिए आते हैं और निराश होकर वापस लौटते हैं।मरीजों को बिना चेकअप किये ही हल्द्वानी के प्राइवेट हॉस्पिटल में रेफर कर दिया जाता है और यह हाल से नहीं बल्कि बहुत समय से ऐसा ही चल रहा है।उन्होंने कहा कि बागेश्वर में किसी भी बीमारी का इलाज नहीं होता है और कोई ना कोई बहाना बनाकर इसे आगे रेफर कर दिया जाता है।अल्ट्रासाऊन्ड के लिए खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को दो से तीन महीने का समय दिया जाता है जबकि पर्ची पर साफ-साफ लिखा हुआ है कि पर्ची सिर्फ 15 दिन के लिए ही वैध है ।जिससे लोग परेशान हैं और समय पर ईलाज ना मिलने पर कई बार जच्चा बच्चा सुरक्षित नहीं रह पाते।उन्होंने कहा कि इसके साथ ही अस्पताल में दलालों का अड्डा बन चुका है जिससे मरीजों को बेहद दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि दलालों के इशारे पर ही खून की जांच के लिए व अन्य जांचों के लिए मरीज बाहर प्राइवेट लेब में रेफर कर दिए जाते हैं।मजबूरी में आये हुए मरीज को प्राइवेट लैब में ही अपना ब्लड टेस्ट व अन्य टेस्ट करवाने पड़ते हैं,जिसके बदले में प्राइवेट लेब मोटा शुल्क मरीजों से वसूलती हैं।इन सब की वजह से लोगों का भरोसा धीरे-धीरे सरकारी अस्पतालों से उठने लगा है और वे प्राइवेट अस्पतालों की ओर रुख करने लगे हैं।उन्होंने कहा कि बहुत बार गुहार लगाने के पश्चात भी प्रशासन जनसामान्य की आवाज को अनसुना कर रहा है और हॉस्पिटल की व्यवस्था में अभी तक कोई सुधार नहीं आया है।उन्होंने बताया कि बागेश्वर में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के चार पद स्वीकृत हैं लेकिन अभी वर्तमान में एक ही पद से काम चलाया जा रहा है।ऐसे ही सभी विभागों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का पद स्वीकृत है लेकिन वह भी रिक्त चल रहा है।प्रधान सहायक के तीन पद स्वीकृत है जिसमें से एक पद रिक्त है। अवर अभियंता और औषधि निरीक्षक के एक-एक पद स्वीकृत होने के बावजूद भी नियुक्ति नहीं हो सकी है।न्यूरोलॉजिस्ट,ऑर्थोपेडिक सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट की कमी के साथ ट्रामा सेंटर भी कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है।स्टाफ नर्स के पांच पद रिक्त चल रहे हैं,जिला क्षय रोग केंद्र भी राम भरोसे चल रहा है जिसमें क्षय रोग अधिकारी,एक्स रे टेक्नीशियन, डार्करूम सहायक के पद भी खाली हैं।इसके साथ ही चपरासी और अर्दली के पद भी रिक्त चल रहे हैं जिससे अस्पताल में अव्यवस्था व्याप्त है।श्री बसेड़ा ने बताया कि इसके अलावा जिला अस्पताल में लगे बेड की भी हालत बहुत खराब है कई बेड में जंग लग चुका है और नियमित साफ-सफाई की कोई व्यवस्था ना होने से मकड़ी के जाले लगे हैं।शौचालय की स्थिति भी बदहाल है। वार्ड में जहां-तहां कूड़ा बिखरा रहता है।इससे आने वाले मरीजों और भर्ती हुए मरीजों पर और बुरा असर पड़ता है जिससे लोग अस्पताल में भर्ती होने से बचना चाहते हैं।उन्होंने कहा कि थोड़ी भी गंभीर बीमारी हुई तो जिला मुख्यालय में इलाज की सुविधा नहीं है।गंभीर हालत में बीमार लोगों को लगभग दो सौ किलोमीटर दूर हल्द्वानी रेफर कर दिया जाता है ऐसी स्थिति में लोगों का समय वह पैसा बहुतायत मात्रा में खर्च होता है।अस्पताल की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए बहुत बार शासन प्रशासन से अलग-अलग संगठनों के द्वारा गुहार भी लगाई जा चुकी है लेकिन शासन-प्रशासन सुनने में आनाकानी करता है।उन्होंने कहा कि एक तरफ हम बात करते हैं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की लेकिन क्या बेटी को बचाना सिर्फ अभिभावकों का दायित्व है?क्या बेटी को बचाने हेतु समुचित मात्रा में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व नहीं है?ऐसे ही अनेक सवाल जन सामान्य के मन में उठते हैं मगर जिनका जवाब हमें कभी मिल नहीं पाता है।उन्होंने मांग की है कि अविलम्ब जिला अस्पताल में जनहित में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
