अल्मोड़ा-शंकर भवन पूर्वी पोखरखाली निवासी विख्यात कवयित्री श्रीमती मनीषा जोशी की देशभक्ति पर रचित कविता-
मैं वतन का लाल हूं मैं जी रहा इसके लिए,
माँ पिता भाई बहन से दूरियाँ इसके लिये,
हो सलामत देश मेरा आरज़ू मेरी यही,
ये लहू इस पर गिरे है ज़ुस्तजु मेरी यही,
कोई दुश्मन आँख भरकर देख न पाये इसे,
और अपना दे के धोखा बेच न पाये इसे,
दिल में मेरे ये मुहब्बत है रवाँ इसके लिए,
मैं वतन का लाल हूं मैं जी रहा….
हर घड़ी मेरी ये आँखें सरहदों पे हैं टिकी,
उलझनें आयी कई पर आँख फिर भी न हटी,
ताप हो या हिमशिखर कोई डिगा न पायेगा,
जान है जब तक सलामत हैसला न जायेगा,
काश बन जाँऊ मैं हर सुख की दवा इसके लिए,
मैं वतन का लाल हूं मैं जी रहा…
सरहदों पर ही मनी होली दिवाली की खुशी,
दिल के रिश्तों से रही ये जेब खाली ही मेरी,
हूं अकेले दूर सबसे याद सबकी पास है,
फिर मिलूंगा मैं सभी से बस यही एक आस है,
आज तो कर्तव्य ने बाँधा यहाँ इसके लिए….
मैं वतन का लाल हूं मैं जी रहा इसके लिए….