देहरादून-आज जारी एक बयान में आम आदमी पार्टी उत्तराखंड के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित जोशी ने कहा कि वर्षों से आपदा की मार झेल रहे उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन अब सवालों के घेरे में है।माननीय उच्च न्यायालय ने गंगोत्री ग्लेशियर में कूड़े से बन रही झील को लेकर एक जनहित याचिका में आपदा सचिव को कोर्ट की अवमानना के लिए यहां तक कह दिया है कि वह इस पद और सरकारी नौकरी के योग्य नहीं है।इससे ये बात साफ होती है कि प्रदेश का आपदा प्रबंधन विभाग खुद अब रेस्क्यू की स्थिति में तो नहीं है।उत्तराखंड आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित जोशी ने कहा कि कोर्ट की इस बात से आपदा प्रबंधन को लेकर स्थिति साफ तौर पर प्रदेश के आपदा प्रबंधन का हाले बयान करती नजर आ रही है। अमित जोशी ने कहा कि सरकार की विधायक,मंत्रियों से समन्वय की कमी तो राज्य की जनता पहले कई बार देख चुकी है लेकिन अब अधिकारियों और सरकार के बीच समन्वय वो भी राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग को लेकर राज्य के प्रति सरकार की उदासीनता साफ तौर पर दिखाती है।उन्होंने कहा कि कोर्ट की इस फटकार के बाद ये तो साफ हो गया है कि मुख्यमंत्री आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर नहीं है या तो उनकी आपदा प्रबंधन विभाग के साथ समन्वय की कमी है।बहरहाल जो भी हो इसका खामियाजा तो जनता को ही भुगतना पड़ेगा।उन्होंने कहा कि नमामि गंगा के नाम पर कई परियोजना और करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाया जा रहा है।लेकिन जिस गंगा के लिए केंद्र, और राज्य सरकार बार बार अपनी प्रतिबद्धता और पीठ थपथपाने का काम करती नजर आती है आज उसी मां गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री ग्लेशियर को लेकर लापरवाही पर कोर्ट सरकार के आपदा प्रबंधन सचिव को ये कहने के लिए मजबूर हो गयी कि ये सचिव पद और सरकारी नौकरी के योग्य नहीं हैं।उन्होंने बताया कि ये मामला चार साल पहले का है जब गंगोत्री ग्लेशियर में कूड़े और उससे झील बनने के मामले में एक जनहित याचिका डाली थी जिसको लेकर आपदा प्रबंधन और सरकार ने पहले माना था कि यहां पर झील बन रही है लेकिन बाद में सरकार ने माना कि हैलीकाप्टर सर्वे में झील नहीं दिखाई दी।इसके बाद कोर्ट ने 2018 में जनहित याचिका पर सरकार को तीन महीने में निगरानी और 6 महीने में रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के लिए कहा था।कोर्ट के आदेश के बाद भी आपदा प्रबंधन विभाग ने कोई भी कार्यवाही ग्लेशियर में बनते तालाब और मलबे को लेकर नहीं की।गंगोत्री ग्लेशियर को लेकर सरकार की उदासीनता पर उच्च न्यायालय ने बेहद नाराजगी जताते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को जमकर फटकार लगाई।आप उपाध्यक्ष अमित जोशी ने कहा ये सरकार इतनी उदासीन कैसे हो सकती है।केदारनाथ में आई आपदा में आज भी कंकाल मिल रहे हैं जबकि सरकार को केदारनाथ से कुछ तो सीख लेनी चाहिए थी।लेकिन लगता है इस सरकार और मुख्यमंत्री को जनता से कोई सरोकार नहीं।नमामि गंगे में पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा लेकिन मां गंगा के मुहाने पर बन रही झील या रुके हुए मलबे से आने वाली आपदा से बेखबर सरकार राज्य की जनता के जान के साथ खिलवाड़ कर रही है।जबकि वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ पी एस नेगी जो हाल में ही वहां का दौरा कर कर लौटे हैं उन्होंने कहा है कि वहां अब झील नहीं है मगर ग्लेशियर का खतरा उससे कहीं अधिक बढ़ गया है। शायद यही वजह है कि इस खतरे को भांप कर हाईकोर्ट ने भी शासन के अधिकारियों के रवैए पर सख्त नाराजगी जाहिर की है।श्री जोशी ने कहा कि सरकार अभी भी नहीं चेती तो कहीं ना कहीं आने वाले समय में एक बड़ी आपदा को भोगना पड़ सकता है।अमित जोशी ने कहा कि सरकार को किसी की जान के साथ खिलवाड़ का कोई हक़ नहीं है भविष्य में केदारनाथ की पुनरावृति ना हो उसके लिए अभी से सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग को गंभीर होकर जल्द से जल्द विशेषज्ञों से मिलकर इसका हल निकालना पड़ेगा ताकि भविष्य के खतरे से अभी आगाह हो सके।