अल्मोड़ा-विकासखंड हवालबाग और ताकुला ब्लॉकों की सीमा पर स्थित विजयपुर पाटिया गांव में बुधवार को गोवर्धन पर्व पर चार गांवों की एकता का प्रतीक बग्वाल संपन्न हुई। इस बार 35 मिनट तक चले पाषाण युद्ध में तीन बग्वालीवीर मामूली रूप से घायल हुए। युद्ध में चार गांवों के 100 से अधिक वीर शामिल हुए। दोनों ओर से हो रही पत्थरों की बारिश के बीच कसून-कोट्यूड़ा के रणजीत सिंह ने पंचघटिया नदी का पानी सबसे पहले पीकर बग्वाल जीत ली।इस अनोखे पाषाण युद्ध में पाटिया, भटगांव के बग्वालीवीर पंचघटिया नदी के एक तरफ जबकि कसून और कोटयूडा गांव के वीर दूसरी तरफ से बग्वाल में शामिल हुए।पाषाण युद्ध में तीन बग्वाली वीरों को मामूली चोट आई है। इसमें कसून-कोट्यूड़ा के रणजीत सिंह के बग्वालीवीर रणजीत सिंह ने पंचघटिया नदी का पानी सबसे पहले पी लिया और बग्वाल जीत ली। जैसे ही उन्होंने पानी पीया शंख ध्वनि के साथ पत्थरों की बरसात रुक गई। पत्थरों की बग्वाल में दो-दो गांव के बग्वालीवीर एक दल में शामिल होकर दूसरे दल पर जमकर पत्थर बरसाते हैं। जो भी दल का सदस्य सबसे पहले नदी में उतर का पानी पी लेता है। उस दल को विजयी घोषित किया जाता है। वहीं,पिछले साल पाटिया-भटगांव गांव के बग्वालीवीरों ने बग्वाल जीती थी।विजयपुर पाटिया में गोवर्धन पूजा के दिन बग्वाल खेली जाती है। एक दल के बग्वालीवीर दूसरे दल के बग्वालीवीरों पर पत्थर फेंककर उन्हें नदी में उतरने से रोकने की पूरी कोशिश करते हैं। पत्थरों से बचकर बग्वालीवीरों को विजयी होने के लिये नदी में जाकर पानी पीना पड़ता है। इस बार 35 मिनट तक दोनों ओर से बग्वालीवीरों को पानी पीने से रोकने को पत्थर बरसते रहे। कसून-कोट्यूड़ा के बग्वालीवीर ने सबसे पहले पानी पीकर बग्वाल जीत ली। युद्ध खत्म होते ही दोनों दलों ने एक दूसरे के गले मिलकर अगले बरस फिर मिलेंगे की बात कहते हुए विदाई ली।विजयपुर पाटिया गांव में बुधवार को बग्वाल युद्ध ढोल नगाड़ों के नाद पर हुआ। ढोल नगाड़ों के बीच बग्वालीवीरों में भी जोश भरते रहा। युद्ध स्थल पर ही मिट्टी लगाकर घायलों का उपचार किया जाता है। विजयपुर पाटिया में बग्वाल के दौरान घायल होने वाले बग्वालीवीरों का उपचार भी स्थानीय स्तर पर किया जाता है।

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