अल्मोड़ा-नगर निकाय चुनावों को लेकर सियासी हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि अल्मोड़ा पहले नगरपालिका थी और सरकार ने प्रमोशन देकर इसे नगर निगम बना दिया।नगर निगम में महापौर की कुर्सी खुद में मायने रखती है और ऐसे में दावेदार का निगम के महापौर की कुर्सी को दावेदारी को सियासी तौर पर मजबूत होना और राजनीतिक ताल्लुक रखना जरुरी हो जाता है। ऐसा ही एक शख्सियत हैं अल्मोड़ा में कांग्रेस के अल्मोड़ा मेयर टिकट के लिए दावेदारों में से सुशीला जोशी। सुशीला जोशी ने अल्मोड़ा नगर निगम में कांग्रेस से टिकट को दावेदारी कर राजनीती में प्रत्यक्ष रूप से प्रवेश की ताल ठोक दी है।अल्मोड़ा में चुनावी हलचल सोमवार को उस समय तेज हो गयी जब सुशीला जोशी ने कांग्रेस पार्टी से आगामी नगर निगम चुनाव में मेयर पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत की।विदित हो कि सुशीला जोशी निवर्तमान पालिकाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रकाश चन्द्र जोशी की पुत्रवधु हैं।सुशीला जोशी के द्वारा मेयर पद पर ताल ठोकने के बाद अल्मोड़ा में सियासी हलचल काफी तेज हैं।इसका एक कारण यह है कि प्रकाश जोशी तीन बार पूर्व में नगरपालिका का चुनाव लड़कर अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर चुके हैं तथा कांग्रेस संगठन में प्रकाश जोशी जैसे वरिष्ठ नेता की काफी अच्छी पैठ भी है।सरकार द्वारा अल्मोड़ा नगर निगम की सीट महिला आरक्षित करने के बाद ही विधिवत रूप से सुशीला जोशी के द्वारा अपनी दावेदारी पार्टी के सम्मुख रखी गयी है। अल्मोड़ा नगर पालिका की सीट हमेशा से ही कांग्रेस का गढ़ रही है। ऐसे में पहली बार नगर निगम बनी अल्मोड़ा सीट को जीतना जहां भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की बात है वहीं कांग्रेस के लिए भी अपना गढ़ बचाना काफी महत्वपूर्ण है।सुशीला जोशी एक अध्यापिका भी रह चुकी हैं और राजनैतिक परिवार से वास्ता रखती हैं।वे विज्ञान विषय से स्नातक तथा बी एड हैं। सुशीला जोशी के ससुर तीन बार पालिकाध्यक्ष रह चुके हैं तो कुछ अनुभव उनको राजनीति में परिवार से मिला है।सुशीला जोशी की दावेदारी के बाद नगर निगम के चुनाव को लेकर बहुत सारे समीकरण बदल गए हैं।

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