अल्मोड़ा-आज दिनांक 15 नवंबर 2024 को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्स वादी )अल्मोड़ा इकाई ने स्थानीय गांधी पार्क में राष्ट्रीय अभियान के तहत चार मुद्दों को लेकर धरना किया।एक राष्ट्र एक चुनाव का विरोध करो,महिलाओं पर हो रहे अत्याचार पर रोक लगाओ,बढ़ती महंगाई पर रोक लगाओ।बढ़ती बेरोजगारी पर रोकलगाओ लगाओ पार्टी की मुख्य मांगे रही।वक्ताओं ने धरना स्थल पर बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार जन विरोधी सांप्रदायिक तथा कारपोरेट परस्त नीतियों को प्रमुखता से उठा रही हैं। उत्तराखंड में डबल इंजन सरकार के शासन में जहां कानून व्यवस्था लड़खड़ा गई है उसके चलते आए दिन महिलाओं,दलितों तथा अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में भारी बढ़ोतरी हुई है।इन घटनाओं में संलिप्त अपराधियों का एक बड़ा हिस्सा सत्ता के संरक्षण में पल रहा है।आज सरकार की कॉर्पोरेट परस्त नीतियों अनियोजित विकास के परिणाम स्वरुप पर्यावरण को भारी क्षति पहुंची है।सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ आए दिन बड़े-बड़े आंदोलन के बावजूद सरकार पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि उत्तराखंड की तमाम योजनाएं पीएमओ से तय हो रही है। कहा कि आज ऊर्जा प्रदेश का खामियाजा हमारी जनता को भुगतना पड़ रहा है।आज डबल इंजन सरकार ने जहां बिजली का ढांचा अपने चहेते अडानी अंबानी के हवाले कर दिया है। इस बीच त्योहारों के दौरान महंगाई अपने चरम पर है जिससे सब्जी खाद्यान्न तेल खाद्य पदार्थ तथा दैनिक उपयोग की वस्तुएं आसमान छू रही है।भाजपा सरकार के शासनकाल में नौकरियां पिछले साल में काफी कम हुई है।हर परिवार के पढ़े लिखे बेरोजगारों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।आज अशिक्षित बेरोजगारों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।सरकार द्वारा सेना की नौकरियां को अग्नि वीर योजना लागू कर पूर्णत: स्थाई कर दिया है जिसका सर्वाधिक नुकसान उत्तराखंड की जनता को हुआ है।एक देश एक चुनाव का फैसला भाजपा का अधिनायकवादी फैसला है जिसका हमारे राज्य सहित पूरे देश में जोरदार विरोध हो रहा है किंतु अधिनायक वादी प्रवृत्ति के चलते भाजपा पीछे हटने को तैयार नहीं है जिसके खिलाफ व्यापक गोलबंदी की जाने की आवश्यकता है। तथा इन्हीं सारे मुद्दों के विरोध में आज देशव्यापी अभियान के तहत भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी अल्मोड़ा ने एक धरना स्थानीय चौहान पाटा में दिया।धरने में आरपी जोशी, युसूफ तिवारी,सुनीता पांडे,योगेश कुमार,मुमताज अख्तर,शाहनवाज अंसारी आदि उपस्थित रहे।
