अल्मोड़ा-द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख जागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। रविवार को देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर परिसर में जुटने लगे। तड़के चार बजे से मंदिरों में घंटियों की ध्वनि और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा।भक्तों ने गंगाजल,बेलपत्र,धतूरा,फूल और चंदन अर्पित कर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।पूरे दिन मंदिरों में पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का क्रम चलता रहा।मंदिर के पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न कराए।जागेश्वर मंदिर के प्रधान पुजारी कैलाशानंद महाराज महामंडलेश्वर ने बताया कि महाशिवरात्रि का दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से जुड़ा है। इस दिन जागेश्वर धाम में की गई पूजा और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व होता है और इसका फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि यह स्थल भगवान शिव की तपोभूमि माना जाता है, जहां पूजा-अर्चना का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। महाशिवरात्रि के अवसर पर जागेश्वर धाम में मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मेले में धार्मिक सामग्री, प्रसाद, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे। कई श्रद्धालुओं ने भंडारे का आयोजन कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। रात के समय मंदिर परिसर का दृश्य और भी अधिक आध्यात्मिक हो गया। चार पहर की विशेष पूजा के तहत भगवान शिव के 1008 नामों के साथ महारुद्राभिषेक और महाभोग लगाया गया। इस दौरान दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु पूरी रात जागकर भगवान शिव का स्मरण करते रहे। वहीं संतान प्राप्ति की कामना लेकर कई महिलाओं ने अखंड ज्योति के साथ विशेष पूजा की।

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