अल्मोड़ा-क्वारब सड़क सुधारीकरण को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा ने बुधवार को जारी बयान में विधायक मनोज तिवारी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सितंबर 2024 में क्वारब के पास बने बड़े भू-स्खलन जोन को लेकर भारत सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय की तकनीकी समिति, टीएचडीसी और आईआईटी के विशेषज्ञों को मौके पर बुलाया गया था। जांच के बाद हिल साइड और वैली साइड ट्रीटमेंट के दो विकल्प सुझाए गए। टम्टा ने कहा कि हिल साइड क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील था, इसलिए तत्काल बड़े मशीनरी कार्य पर रोक लगाई गई। इसके लिए टीएचडीसी ने 51.37 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार कर मंत्रालय को भेजी, जिसे स्वीकृति मिल चुकी है। काम की शुरुआत 7 जुलाई 2025 से की गई है, जो एक वर्ष में पूरा होगा और ठेकेदार को अगले दस साल तक रखरखाव करना होगा। इसी तरह वैली साइड ट्रीटमेंट के लिए 17.14 करोड़ रुपये की परियोजना को भी मंजूरी मिली और 17 फरवरी 2025 से काम शुरू हुआ, जिसे फरवरी 2026 तक पूरा किया जाना है। राज्यमंत्री ने बताया कि वैली साइड का लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा भी हो चुका है। वहीं स्थानीय मीडिया में दीवारों में दरार की खबरें सामने आने के बाद उच्च स्तरीय तकनीकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि आमजन को राहत देने के लिए क्वारब-डोबा-चौंसली मोटर मार्ग के समानांतर 1.70 किलोमीटर लंबा वैकल्पिक मार्ग बनाने की योजना बनाई गई। इसके लिए 10.23 करोड़ रुपये की स्वीकृति भारत सरकार से कराई गई और 16 जून 2025 से कार्य भी शुरू हुआ। इसे तीन माह में पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन 18 जून को विधायक मनोज तिवारी और कांग्रेस नेताओं ने निर्माण का विरोध कर दिया और निविदा प्रक्रिया की मांग की। इसके चलते काम रुक गया और अब यह 19 सितंबर 2025 से दोबारा शुरू हुआ है। टम्टा ने कहा कि जो वैकल्पिक मार्ग सितंबर तक तैयार होना था, वह कांग्रेस की हठधर्मिता के कारण चार महीने पीछे चला गया। उन्होंने सवाल किया कि अगर विभागीय प्रक्रिया पर संदेह था तो तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए थी, न कि जनता की सुविधा के लिए बन रही सड़क को रोका जाता। राज्यमंत्री ने कहा कि भूवैज्ञानिकों की चेतावनी के बावजूद कांग्रेस केवल राजनीति चमकाने के लिए जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने कांग्रेस और विधायक मनोज तिवारी से पूछा कि जनता के लिए स्वीकृत वैकल्पिक सड़क मार्ग का विरोध आखिर क्यों किया गया।
