अल्मोड़ा-नगर के कर्नाटक खोला रामलीला मैदान में चल रहे होली महोत्सव में रात्रि को कुमाऊंनी खड़ी होली गायन का कार्यक्रम चल रहा है। वरिष्ठ रंगकर्मी बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि कुमाऊंनी होली में खड़ी होली का विशेष महत्व माना जाता है।होली के रंग पड़ने से छलड़ी के दिन तक मंदिरों (शिवालयों),सार्वजनिक स्थानों पर खड़ी होली गायन किया जाता है।चीर बंधने के साथ ही होलियारों द्वारा खड़ी होली का आयोजन किया जाता है।होली के पहले दिन चीर बांधी जाती है।इसके लिए प्रत्येक घर से नये कपड़े के रंग बिरंगे टुकड़े चीर के रूप में लेकर पदम के वृक्ष की टहनी में बांधे जाता है।कुमाऊं में चीर हरण की भी परम्परा है।दूसरे गांव मोहल्ले के लोग इस चीर को चुराकर अपने यहां ले जाते हैं तो अगली होली से इस स्थान की होली में चीर बन्धन की परम्परा स्वत: समाप्त हो जाती है,इसलिए चीर को हरण होने से बचाने के लिए इसकी रक्षा की जाती है,जिसके लिए रात्रि में होली गायन कार्यक्रम किया जाता है और होलिका दहन के दिन इस चीर का भी विधिवत दहन किया जाता है।कैलै बांधी चीर,हो रघुनंदन राजा,गणपति बांधी चीर हो रघुनंदन राजा,जल कैसे भरूं यमुना गहरी,ठांडे भरु राजा राम देखत है,जोगी आयो शहर में व्योपारी,इस व्योपारी को प्यास बहुत है,शिव के मन माहीं बसे काशी,आधी काशी में ब्राह्मण बनिया जैसी खड़ी होली का गायन सामुहिक रूप से किया जा रहा है।इस खड़ी होली गायन में मुख्य रूप से देवेन्द्र कर्नाटक,हंसा दत्त कर्नाटक,लीलाधर काण्डपाल,हेम चन्द्र जोशी, विनोद कर्नाटक,बद्री प्रसाद कर्नाटक,मोहन चंद्र कर्नाटक, रमेश चंद्र जोशी,अनिल जोशी,हेम जोशी, बृजेश पांडे,हेम पाण्डे,प्रयाग दत्त जोशी,जीवन तिवारी, अभिषेक तिवारी माला तिवारी,रेखा जोशी,दीपा कर्नाटक सहित अनेकों स्थानीय लोग,महिलाऐं उपस्थित रहती हैं।
