अल्मोड़ा-सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर कार्मिकों,शिक्षकों द्वारा मत रखने पर सरकार द्वारा एस ओ पी जारी करने की बात कही है इसी मुद्दे पर उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड जनपद अल्मोड़ा के अध्यक्ष डॉ मनोज जोशी व सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि जब कार्मिक की समस्यायों का समाधान नहीं होता तभी पदाधिकारी व कार्मिकों द्वारा सोशल मीडिया व वाट्स एप ग्रुपों में अपनी बात रखी जाती है। सरकार कर्मचारी नियमावली का हवाला देकर एस ओ पी जारी करने की बात कह रही है लेकिन सरकार को खुद भी ध्यान देना चाहिए कि मुख्यमंत्री कार्यालय सहित सचिवालय से कितने पत्रों का जबाब समय से जाता है या जाता ही नही है सचिवालय सहित सभी निदेशालयों को भी एस ओ पी जारी होनी चाहिए कि किसी भी प्रकरण को अधिकतम एक माह से ज्यादा लंबित न रखा जाय और उस प्रकरण पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित किया जाए।आज के दिन सैकड़ों मामले कोर्ट भी लंबित चल रहे हैं उनका भी निदान होना चाहिए जब कार्मिकों की समस्यायों का समाधान नहीं होता तभी बातें लिखी जाती है। संगठन को उम्मीद है कि विभागीय कार्रवाई हेतु भी एस ओ पी जारी की जाय और हर महीने अनिवार्य रूप से से जिलाधिकारी सहित सभी अधिकारी जनपद मंडल व प्रांत में राजधानी सहित सभी स्थानों में बैठको का आयोजन करेंगे और समसामयिक समस्याओं का समाधान कर शासनादेश जारी करेंगे न कि विभागीय परीक्षण की बात कर मामलों को वर्षों तक लटकायेंगे। उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड द्वारा इस राज्य निर्माण के लिए 94 दिन की हड़ताल की गई थी सभी को सम्मानित कर उन्हें राज्य आंदोलनकारी भी घोषित करना चाहिए। शिथिलीकरण, मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों को आहरण वितरण अधिकार, गोल्डन कार्ड विसंगति, फारगो नियमावली में संशोधन, एक्ट विसंगतियों के निराकरण, अनिवार्य स्थानांतरण के समय अनिवार्य रूप से काउंसलिंग होनी चाहिए। पाठक ने कहा कि कार्मिकों के बाल्यकाल अवकाश मातृत्व अवकाश, लंबी अवधि चिकित्सा अवकाश जाने पर अतिथि कार्मिकों की व्यवस्था भी होनी चाहिए। सूचना अधिकार के तहत पदों का सृजन भी किया जाना चाहिए। सरकार व शासन को कार्मिकों को बंधुआ मजदूर न समझकर उनकी समस्या के निराकरण के लिए भी समाधान करना चाहिए। पुरानी पेंशन बहाली भी लंबित है इसका भी निराकरण करना चाहिए।हर विभाग के एच ओ डी को अनिवार्य सभी संगठनों के साथ वार्ता करनी चाहिए जिससे समस्या का समाधान हो सकें।
