अल्मोड़ा-एजुकेशनल मिनिस्ट्रीयल आफीसर्स एसोसिएशन के मण्डलीय अध्यक्ष पुष्कर सिंह भैसोड़ा एवं मंडलीय सचिव हरजीत सिंह ने प्रैस को जारी एक संयुक्त बयान में कहा है कि उत्तराखंड में कार्मिकों के हितों के साथ कुठाराघात हो रहा है। जहां विधानसभा में पूर्व विधायकों की पेंशन को 40 हजार से 60 हजार कर दिया गया वहीं शिक्षक व कार्मिकों द्वारा पुरानी पेंशन बहाली की मांग पर राजकोषीय घाटा के बहाना बनाकर टाला जा रहा है। सरकार की कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर हो गया है। पुरानी पेंशन जहां बुढ़ापे का सहारा थी उसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय बंधु के एन एम ओ पी एस के बैनर तले नेतृत्व में सभी घटक संगठनों द्वारा लगातार धरना प्रदर्शन आंदोलन किए जा रहे हैं लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। पुरानी पेंशन हर हाल में जरूरी है इस हेतु सरकार को भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। शिथिलीकरण जैसे मुद्दे पर सरकार गंभीर नहीं है जबकि पदोन्नति के सैकड़ों पद विभिन्न विभागों में खाली है ऐसी स्थिति में वर्क लोड पर भी सरकार खामोश हो रही है। शिथिलीकरण को भी विस्तारित करते हुए शासनादेश जारी करना चाहिए।गोल्डन कार्ड में विसंगति बनी हुई है जब तक अस्पताल में भर्ती नहीं होते हैं तब तक गोल्डन कार्ड लागू नहीं होता जबकि एक्स-रे अल्ट्रासाउंड व अन्य बिना भर्ती हुए चिकित्सा के काम होते हैं उन्हें गैर महत्त्व करार देते हुए गोल्डन कार्ड मान्य नहीं किया गया है।आखिर जब गोल्डन कार्ड बना है तो उसे पर्चे से लेकर दवाई व छोटे सभी इलाजों के लिए लागू करना चाहिए। यह भी कार्मिक के साथ मजाक ही है।गोल्डन कार्ड के भीतर चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए वेतन से विभिन्न वेतनमान स्तरों पर कटौती हो रही है वर्तमान में विभिन्न वेतन स्तरों पर 250,450,650,1000 की कटौती वेतन से हो रही है।इस सम्बन्ध में शासन के अधिकारियो का बयान समाचार पत्र में जारी हुआ है कि यह धनराशि पर्याप्त नहीं है इसे दुगुना करने पर भी विचार किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में वेतन से कटौती भी होगी और इलाज की स्थिति बयां कर रही है कि कार्मिक भारी परेशानी में हैं। पूर्व में व्यवस्था थी कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिल बिना धनराशि कटौती के विभाग द्वारा पारित किए जा रहे थे और अब व्यवस्था बनाने के बाद इलाज पर्याप्त नहीं है। समय पर प्राधिकरण द्वारा बिल पारित न करने पर अस्पतालों में भी गोल्डन कार्ड से इलाज संभव नहीं हो रहा है।अस्पतालों का भी स्पष्ट कहना है कि गोल्डन कार्ड से इलाज संभव नहीं है और 6 महीने तक भी अस्पतालों को भुगतान नहीं हो रहा है।ऐसी स्थिति में सरकार शासन स्वयं विचार करें कि आखिर चिकित्सा प्रतिपूर्ति किस प्रकार संभव होगी।पदोन्नति मामलों में भी सिलसिलेवार पदोन्नति नहीं हो रही है क्यों नहीं उसे समयबद्ध किया जाता है आखिर पदोन्नति सेवा का प्रतिफल है तो उसे लटकाए जाने का मतलब समझ से बाहर है जबकि बीच भर्ती वर्ष में जो कार्मिक सेवा निवृत्त होते हैं उन्हें भी पदोन्नति मिलनी चाहिए ऐसा नहीं हो रहा है। वर्तमान में सरकार व शासन व विभागों की कार्मिक विरोधी नीति उचित नहीं है इसका लगातार प्रतिकार किया जायेगा। मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों के आहरण वितरण अधिकार व कर्तव्य व उत्तरदायित्व के लिए भी विभागों द्वारा स्पष्ट अधिकार नहीं दिये गये हैं सभी कार्मिकों को अनिवार्य रूप से प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि समय के अनुसार अपडेट रहें। उत्तराखंड सरकार द्वारा स्थानांतरण एक्ट विसंगतियों को भी दूर नहीं किया जा रहा है। अनिवार्य स्थानांतरण में सुगम से दुर्गम व दुर्गम से सुगम है लेकिन दूसरा स्थान अनुरोध के आधार पर दिया गया है जो कि एक्ट का भी उल्लंघन है। सरकार द्वारा एक्ट को भी 15 फीसदी लागू किया जा रहा है जबकि सौ फीसदी स्थानांतरण होने चाहिए ताकि वास्तविक रूप से एक्ट का फायदा सभी कार्मिकों को मिले। सरकार ने अपनी सभी नीतियों पर विचार करना चाहिए। ए सी पी 10,16,26, भी दिया जाना चाहिए उस पर भी सरकार गंभीर नहीं है। प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी लेवल 11 का पद भी सृजित किया जाना चाहिए।सभी मुद्दों पर सरकार व शासन को कार्यवाही कर शासनादेश जारी करना चाहिए। सभी मांगों पर शासनादेश जारी करने की मांग है।

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