अल्मोड़ा-आज जारी एक बयान में उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड के प्रदेश उपाध्यक्ष व उत्तरांचल फैडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन कुमाऊं मंडल नैनीताल के अध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री महोदय द्वारा स्थानांतरण एक्ट व हड़ताल प्रदेश से मुक्त होने को अपनी उपलब्धियों में गिनाया जा रहा है जबकि हालत यह है कि दो वर्षों से स्थानांतरण एक्ट के तहत कोई भी स्थानांतरण नहीं हुए हैं।ऐसे में कर्मचारी अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और इसका प्रभाव पदोन्नति में भी पड़ रहा है और कार्मिकों की पदोन्नति दूरस्थ इलाकों में हो रही है।उन्होंने कहा कि एक जिले से पांचवें छठे सातवें जिले तक पदोन्नति हो रही है जबकि दुर्गम से सुगम स्थानांतरण होते रहते तो नजदीक के दुर्गम स्थानों को लाभ मिलता।एक तरफ तो सरकार एक्ट होने की बात करती है और खुद ही रोक लगाती है। सुगम स्थानों पर भी पद तेजी से खाली हो गए हैं वहां काम करने के लिए कार्मिक नहीं है।कोविड के कारण कार्मिकों के संगठन भी हड़ताल आन्दोलन आदि से बचने की कोशिश कर रहे हैं।जब धारा 27 या अन्य के तहत स्थानांतरण हो रहे तो एक्ट के तहत स्थानांतरण नहीं रोके जाने थे।उन्होंने कहा कि अभी दिसंबर का महीना खत्म होने जा रहा है लेकिन शायद ही किसी विभाग में भर्ती वर्ष 20-21 के लिए डी पी सी हुई हो।प्रदेश में कार्मिकों के हितों की अनदेखी की जा रही है।श्री पाठक ने कहा कि उत्तराखंड इतने गर्त में धकेल दिया जायेगा किसी को भी उम्मीद नहीं थी। राजधानी का एक कोने में होने का भी एक कारण है नेताओं और नौकरशाही पर किसी का कोई दबाव नहीं है।दो वर्षों से स्थानांतरण एक्ट के तहत स्थानांतरण नहीं होना इस का उदाहरण है और पदोन्नति स्थानांतरण व समायोजन में काउंसिलिंग का नहीं होना अपने आप पारदर्शिता का अभाव है।सरकार ने कार्मिक संगठनों के सुझावों को भी नहीं माना।उन्होंने कहा कि कल तक चिकित्सा प्रतिपूर्ति में नियमानुसार सौ प्रतिशत देने वाली सरकार इस मद को ही खत्म करना चाह रही है और कर्मचारियों से ही सौ प्रतिशत अंशदान चाहती है।आखिर जो मद चिकित्सा प्रतिपूर्ति का था उस मद को क्यों बंद करना चाहतीं हैं? सरकार को भी अपना अंशदान गोल्डन कार्ड में निर्धारित करना चाहिए।श्री पाठक ने कहा कि कार्मिकों के पैसे से कार्मिकों का इलाज यह नीति सरकार की है।फारगो नियमावली को भी निरस्त करने की आवश्यकता है। सरकार को पदोन्नति समायोजन व स्थानांतरण में काउंसिलिंग अनिवार्य करना चाहिए।सरकार प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण करने को तैयार है लेकिन पारदर्शिता व न्याय पूर्ण नीति बनाने को तैयार नहीं है।मिनिस्ट्रीयल संवर्ग में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजपत्रित घोषित पद पर जनपद से बाहर पदोन्नति दी जा रही है जबकि अन्य संवर्ग में जनपद के भीतर ही पदोन्नति के अवसर है।इस नीति को भी बदलना होगा सेवा के अंतिम पड़ाव पर जिला बदर उचित नहीं है।सरकार को भी एक बार मामलों में समीक्षा करनी चाहिए जिसको सरकार अपनी उपलब्धियों में गिना रही है उस जगह से कार्मिकों की सिसकियां नहीं सुनाई दे रही है।बेसिक शिक्षा परिषद से राजकीय सेवा में आये कार्मिकों व शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से ए सी पी और शिक्षकों को चयन प्रोन्नत में लाभ नहीं दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय से कोई फैसला हो रहा है तो सभी पर लागू नहीं किया जा रहा है।सरकार को सभी कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को वार्ता में आमंत्रित करना चाहिए।वर्तमान में सरकार की कोई उपलब्धि नहीं है सभी विसंगतियां हैं।कई ज्वलंत मुद्दों पर भी निर्णय नहीं हुये है।