अल्मोड़ा-आस्था,परंपरा और लोकसंस्कृति के प्रतीक ऐतिहासिक नंदा देवी मेले की तैयारियों के तहत शुक्रवार को नंदा देवी मेला समिति,राज पुरोहित एवं सैकड़ों भक्तजन दुलागांव रेलाकोट पहुँचे।यहाँ पारंपरिक कदली वृक्ष आमंत्रण की अनूठी परंपरा का आयोजन किया गया।नंदा देवी मंदिर परिसर से माँ नंदा सुनंदा के जयकारों के साथ भक्तों का काफिला दुलागांव रवाना हुआ। पूरे मार्ग में भक्तिमय माहौल छाया रहा और ग्रामवासियों ने ढोल दमाऊं की थाप पर उनका स्वागत किया।गांव पहुँचने पर सर्वप्रथम समिति के सदस्य एवं भक्तजन देवी थान मंदिर पहुँचे, जहाँ ग्राम की महिलाओं ने पारंपरिक भजनों की मधुर प्रस्तुतियाँ दीं।इसके बाद विधि विधान के साथ मंदिर में पूजा अर्चना की गई।पूजा के उपरांत समिति के पदाधिकारी,भक्तजन और स्थानीय ग्रामीण कदली वृक्ष के पास पहुँचे और माँ नंदा-सुनंदा के आगमन हेतु औपचारिक आमंत्रण दिया।इस दौरान पूरा क्षेत्र जयकारों से गूंज उठा।दुलागांव रेलाकोट के ग्रामीणों ने आगंतुक श्रद्धालुओं और समिति के सदस्यों के लिए भंडारे का आयोजन किया।सभी ने प्रसाद ग्रहण कर धार्मिक अनुष्ठान की गरिमा में सहभागिता निभाई।ग्रामीणों ने समिति का पारंपरिक तरीके से स्वागत कर आभार व्यक्त किया और नंदा देवी मेले की ऐतिहासिकता एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का संकल्प दोहराया।इस वर्ष पुष्कर सिंह व योगेश सिंह के घर से कदली वृक्ष लाने का चयन हुआ है।इस अवसर पर मेला समिति के सचिव मनोज सनवाल,मेला सह संयोजक रवि गोयल, व्यवस्थापक अनूप साह,मुख्य सांस्कृतिक संयोजक एवं कोषाध्यक्ष हरीश बिष्ट,मुख्य संयोजक अर्जुन बिष्ट चीमा, संयोजक मेला अमित साह (मोनू),संयोजक अमरनाथ सिंह नेगी,मीडिया प्रभारी कपिल मल्होत्रा,पार्षद कुलदीप मेर,सह संयोजक मेला पार्षद अभिषेक जोशी,सह संयोजक मनोज भंडारी (मंटू),धन सिंह मेहता, जीवन नाथ वर्मा,मेला सह संयोजक राजेंद्र बिष्ट, व्यवस्थापक हरीश भंडारी, हितेश वर्मा,जगत तिवारी, आशीष बिष्ट,दया कृष्ण परगाई, नमन बिष्ट,पंकज परगाई, आदित्य बिष्ट,पार्षद ज्योति साह, निर्मला जोशी,राज्य मंत्री गंगा बिष्ट,पूर्व पालिका अध्यक्ष शोभा जोशी तथा धीरेंद्र सिंह रावत,धन सिंह रावत,त्रिलोचन जोशी, दिनेश मठपाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन पारंपरिक ढंग से किया गया।धार्मिक अनुष्ठानों में युवाओं,महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।ग्रामवासियों का उत्साह और समिति की तत्परता इस बात का प्रमाण रही कि नंदा देवी मेला केवल एक पर्व ही नहीं बल्कि कुमाऊँ की सांस्कृतिक पहचान है।मेला समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि इस परंपरा का उद्देश्य समाज में पारस्परिक एकता,आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण है।उन्होंने बताया कि कदली वृक्ष आमंत्रण के साथ ही नंदा देवी महोत्सव की औपचारिक तैयारियाँ प्रारंभ हो गई हैं।आने वाले दिनों में नगर में शोभायात्राएँ,सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएँगे।ग्रामवासियों और समिति के पदाधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष का मेला पहले से भी अधिक भव्य होगा और देश विदेश से आने वाले श्रद्धालु माँ नंदा सुनंदा के दर्शन कर पुण्यलाभ प्राप्त करेंगे।
