अल्मोड़ा-जिलाधिकारी अंशुल सिंह की अध्यक्षता में आज वन पंचायत सरपंचों की बैठक आयोजित की गई जिसमें सरपंचों ने वन पंचायतों से संबंधित प्रमुख समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा।सरपंचों ने उत्तराखंड पंचायती वन नियमावली 2005 (संशोधित 2024) में हुए संशोधन, सरपंच को निश्चित मानदेय की व्यवस्था,वन पंचायतों को अधिक स्वायत्तता देने तथा विभागीय कार्यों में उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से तय करने की आवश्यकता पर बल दिया।उन्होंने बैठक में यह मांग भी जिलाधिकारी के समक्ष रखी कि वन विभाग पंचायतों में अपने सभी कार्यों की पूर्व सूचना वन पंचायतों को अनिवार्य रूप से दे, वन क्षेत्रों में अतिक्रमण को चिह्नित कर हटाने की कार्रवाई हो,वनाग्नि को रोकने के लिए धनराशि प्रत्येक वन पंचायत को दी जाए और प्रदेश परामर्शदात्री समिति में सरपंचों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।जिलाधिकारी ने कहा कि सरपंचों के मुद्दों और सुझावों को समझने तथा समाधान की दिशा में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए ही यह बैठक आयोजित की गई है।उन्होंने कहा सरपंचों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।साथ ही उनके अधिकार सुरक्षित रखा जाना सुनिश्चित किया जाएगा।जिलाधिकारी ने वन पंचायत क्षेत्रों में अतिक्रमण के मामलों कार्रवाई करने की बात भी कही।जनपद अल्मोड़ा में कुल 2089 वन पंचायतें हैं, जिनमें से 19 आरक्षित वन क्षेत्रों तथा शेष सभी सिविल भू-राजस्व क्षेत्रों में गठित हैं। वन पंचायतों के संरक्षण और प्रबंधन के अधीन कुल 49,648.49 हेक्टेयर वन क्षेत्र शामिल है।बैठक के दौरान डीएफओ दीपक सिंह,प्रदीप कुमार,संतोष कुमार पंत , एडीएम युक्ता मिश्र सहित विभिन्न वन पंचायतों के सरपंच मौजूद रहे।

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